भोपाल (राज्य ब्यूरो)। किसानों को समृद्ध बनाने के लिए रेशम उत्पादन में सरकार कई तरह से मदद कर रही है, लेकिन यह उद्योग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। नर्मदापुरम जिले में सात साल के भीतर तीन अलग-अलग घोटालों में ढाई सौ करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार का अनुमान है। रेशम आयुक्त ने पिछले हफ्ते दो कर्मचारियों को गड़बड़ी के आरोप में निलंबित किया है, लेकिन उन बड़े अधिकारियों पर आंच नहीं आई जिनका काम निगरानी का था।

किसानों ने अलग-अलग समय में इसकी शिकायत लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) और विभाग के अधिकारियों से की है। इसके बाद भी गड़बड़ी नहीं रुक रही है। तीनों मामलों में अलग-अलग तरह की गड़बड़ी की गई है। कहीं ज्यादा जमीन में उत्पादन दिखाकर सब्सिडी राशि अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपनी जेब में डाल ली तो कहीं स्टाक ही गायब कर दिया। रेशम उत्पादन के लिए घर बनाने में भी शर्तों का पालन नहीं किया गया। रेश्ाम संचालनालय की तरफ से जांच एजेंसियों को दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

इस प्रकार हुआ घोटाला

घोटाला -1: पहला घोटाला 2015 में सामने आया था। इसकी शिकायत लोकायुक्त में की गई थी। मामले की जांच चल रही है। यह करीब 200 करोड़ रुपये का घोटाला बताया जा रहा है। इसमें अधिकारियों-कर्मचारियों ने मिलकर शहतूत की खेती का रकबा ज्यादा दिखाया था। दरअसल, इसके लिए भारत सरकार से अनुदान मिलता है। इस कारण खेती का ज्यादा क्षेत्र दिखाकर ज्यादा अनुदान (सब्सिडी) लिया गया। दूसरी गड़बड़ी रेशम के कीड़े पालने के लिए बनाए जाने वाले घरों के निर्माण में हुई। घर बनाने में निविदा शर्ताें का पालन भी नहीं किया गया। लोकायुक्त पुलिस की तरफ से जांच को आगे बढ़ाने के लिए रेशम संचालनालय से दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन संचालनालय की तरफ से अभी तक जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। जांच के बाद इस गड़बड़ी का आंकड़ा 200 करोड़ से ऊपर पहुंच सकता है।

घोटाला- 2: ककून (जिससे रेशम का धागा निकलता है) बैंक मालाखेड़ी में जितना स्टाक होना चाहिए उतना नहीं मिला। 11.50 करोड़ रुपये का स्टाक कम था। 2019 में यह मामले सामने आया था, जबकि गड़बड़ी 2007-08 से शुरू होने के तथ्य मिले हैं। इस मामले की विभागीय जांच चल रही है, लेकिन अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में रेशम के वस्त्रों के उत्पादन का भी मिलान किया जा रहा, जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है। किसानों ने जिला रेशम अधिकारी शरद श्रीवास्तव के खिलाफ नामजद शिकायत की थी।

घोटाला-3: रेशम विस्तार केंद्र वनखेड़ी के दो कर्मचारी संतोष तिवारी और जगदीश विश्वकर्मा को 21 सितंबर को आयुक्त रेशम मनु श्रीवास्तव ने निलंबित किया था। आरोप है कि संतोष ने आदिवासी किसान की भूमि ठेेके पर लेकर वित्तीय भुगतान में गड़बड़ी की है। वहीं, जगदीश ने अनुचित तरीके से अपने परिवार के लोगों को योजना में फायदा पहुंचाया। पलिया पिपरिया गांव के किसान अकबर अहमद ने इसकी इसकी श‍िकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इओडब्ल्यू) में की है। इसमें उन्होंने लिखा था कि जदगीश ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। श‍िकायत में उल्लेख है कि इसमें कुछ बड़े अधिकारियों का भी हाथ है। यह गड़बड़ी 10 करोड़ से ऊपर की हो सकती है। इसकी विभागीय जांच चल रही है, जिसमें सच्चाई सामने आएगी।

इनका कहना है

हाल ही में दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। विभागीय जांच भी चल रही है। दूसरे अधिकारियों के खिलाफ कोई श‍िकायत नहीं मिली है, इसलिए उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

मनु श्रीवास्तव, आयुक्त, रेशम

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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