अंजली राय, भोपाल। कोरोना हो गया और अस्पताल में बेड नहीं मिला तो क्या करेंगे? रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला तो कैसे बचेंगे? कोरोना का नया स्ट्रेन कितना घातक है? यह वे सवाल हैं जो मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा चलाई जा रही प्रो-एक्टिव कॉलिंग हेल्पलाइन में ज्यादातर लोग पूछ रहे हैं। इनके आधार पर डॉक्टरों ने अनुमान लगाया है कि इस बार लोग कोरोना संक्रमण से इतना नहीं घबरा रहे हैं, जितना इसके मरीजों के इलाज में हो रही अव्यवस्थाओं से परेशान हैं।

कोरोना से डरें नहीं बल्कि मजबूती के साथ सामना करें, इसी उद्देश्य के साथ एनएचएम ने बेंगलुरु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस के साथ मिलकर यह हेल्पलाइन शुरू की है। हेल्पलाइन की खास बात यह है कि डॉक्टर, मनोविज्ञानी और मनोचिकित्सकों वाली 40 लोगों की इनकी टीम खुद लोगों को फोन कर उनका हौसला बढ़ा रही है। अप्रैल 2020 से अब तक लगभग 62 हजार लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें मानसिक संबल दे चुकी है। इस हेल्पलाइन के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर 08046110007 भी शुरू किया गया है। इस पर मानसिक व भावनात्मक परामर्श प्रदान किया जा रहा है।

इस तरह की उलझनें सुलझाई जा रहीं

अस्पताल में बेड नहीं मिला तो क्या करेंगे?

- आप बीमारी को अपने ऊपर हावी न होने दें। घबराएं नहीं, धैर्य से काम लें। अगर हल्के लक्षण हों तो उसे अधिक भयभीत होकर बढ़ाएं नहीं। जैसा डॉक्टर कहें, करते जाएं।

ऑक्सीजन नहीं मिली तो हमारा क्या होगा?

-डॉक्टर की सलाह के अनुसार ऑक्सीजन लेवल जांच करते रहें। ऑक्सीजन लेवल कम हो तो बिना घबराए तत्काल डॉक्टर को सूचित करें। घबराने से ऑक्सीजन की जरूरत और बढ़ जाएगी।

रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला तो कैसे बचेंगे?

- हर मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती है। केवल डॉक्टर की सलाह मानें।

कोरोना का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है?

कोरोना का नया स्ट्रेन ज्यादा संक्रामक है। इससे संक्रमण ज्यादा जल्दी फैलता है, इसलिए सतर्क रहना ही एकमात्र उपाय है।

काउंसलर दे रहे हैं यह सलाह

  • शारीरिक दूरी बनाएं, लेकिन मानसिक व भावनात्मक लगाव बनाकर रखें।
  • धैर्य रखें, विचलित न हों, सकारात्मक रहें। स्वयं को व्यस्त रखें। खुद को रचनात्मक कार्यों में लगाएं।
  • आशावान रहें, ये दिन भी गुजर जाएंगे।
  • आठ से नौ घंटे की नींद पूरी करें।
  • भले ही अकेले रहें, लेकिन अपनों से वीडियो कॉल से बात करते रहें।
  • पसंद का संगीत सुनें, फिल्म देखें।
  • 20 मिनट योग व ध्यान के लिए जरूर निकालें।

इनका कहना

इस बार लोगों को यह डर ज्यादा है कि अगर कोरोना हो गया तो ऑक्सीजन, इंजेक्शन या अस्पताल में बेड मिलेगा या नहीं। ऐसे लोगों की तीन से चार बार काउंसिलिंग की जा रही है।

-डॉ. राहुल शर्मा, मनोचिकित्सक

कम लोगों को ऑक्सीजन, अस्पताल और रेमेडेसिविर की आवश्यकता है लेकिन घबराहट और तनाव के कारण लोग इन आवश्यकताओं को कई गुना बढ़ा रहे हैं। इसका परिणाम यह होता है कि जिनके लिए यह जरूरी है, उन्हें यह उपलब्ध नहीं हो पाती, इसीलिए लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है।

- डॉ. शरद तिवारी, उप संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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