भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्य प्रदेश में शराबबंदी के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने दोहराया कि महिला और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों और सड़क दुर्घटनाओं का मूल कारण शराब का सेवन है। शराबबंदी के लिए राजनीतिक साहस और समाज में चिंतन जरूरी है। मैं इस मुद्दे पर अवसर की प्रतीक्षा में थी। शराब से मिलने वाले राजस्व की भरपाई के लिए और विकल्प तलाशे जाने चाहिए।

उमा भारती शुक्रवार को अपने आवास पर पत्रकारों से चर्चा कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि जब मैंने गुस्र्वार को बयान दिया था तब पता नहीं था कि राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी इस पर बयान दे चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान शराब नहीं मिलने से किसी की मौत नहीं हुई। तब मैंने पार्टी के दो प्रमुख नेताओं से कहा था कि इस लाइन पर आगे बढ़ना चाहिए। समाज की तरफ से शराबबंदी को लेकर कोई दिक्कत नहीं आती है। महिलाओं का सहयोग मिलेगा।

बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिवराजसिंह चौहान सामाजिक चिंतन की सोच रखते हैं। मैं शिवराज जी से भी इस विषय पर मुलाकात करूंगी। शराबबंदी को लेकर अभियान चलाने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण, तिरंगा यात्रा सहित जितने भी मुद्दे मेरे द्वारा उठाए गए, मैंने उन्हें पूरा किया है। मंजिल तक पहुंचने से पहले मैंने कभी रास्ता नहीं छोड़ा। माफिया की सरकार में पैठ के सवाल पर कहा कि माफिया किसी राजनीतिक दल के नहीं होते। सरकार किसी की भी हो, वे पैठ बना लेते हैं। उन्हें सिर्फ मुनाफे से मतलब है।

शराबबंदी पर राजस्व के घाटे को लेकर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक संसाधन से भरपूर है। गौ-पालन, वन संपदा और ईको टूरिज्म के जरिये इस घाटे की भरपाई की जा सकती है। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में इस तरह के विकल्पों पर भी विचार किया गया है। शराबबंदी को चरणवार तरीके से भी लागू किया जा सकता है। शराबबंदी के बाद सरकार में शामिल लोग भी शराब के मामले में पकड़ाते हैं तो यही कहूंगी कि वे पहले शहंशाह की तरह पीते थे, अब चोरों की तरह पी रहे हैं।

ज्योतिरादित्य के खिलाफ नहीं किया प्रचार

उमा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को वे बचपन से जानती हैं। जब वे कांग्रेस में थे, तब भी मैं उनके खिलाफ चुनाव प्रचार करने उनके क्षेत्र में नहीं गई। मेरे पड़ोसी बनने पर मुझे खुशी है। उनका भविष्य उज्जवल है।

जुबान ही दिग्विजय की दुश्मन

श्रीराम मंदिर मुद्दे को लेकर दिग्विजय सिंह द्वारा पूछे गए सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह राजनीति में और बड़े कद के नेता हो सकते थे लेकिन उनकी जुबान ही उनकी सबसे बड़ी दुश्मन है। मैं मानती हूं कि उन्होंने श्रीराम मंदिर के लिए चंदा मन से दिया होगा लेकिन फिर अपनी बात कहकर गड़बड़ कर दी। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में अहंकार और हठ को छोड़ना होगा।

Posted By: Ravindra Soni

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