भोपाल। बड़े तालाब पर एमपी टूरिज्म कार्पोरेशन द्वारा चलाए जा रहे कू्ज अब अन्य बोटों की तरह सूर्यास्त के बाद नहीं चला सकेंगे। कू्ज को निर्धारित रूट पर ही संचालित करना होगा। इसका एक ट्रिप 45 मिनट का होगा।

सोमवार को यह निर्णय नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह द्वारा बुलाई गई एमपी टूरिज्म कार्पोरेशन, मछुआरा संघ और मत्यस्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में लिए गए।

इस दौरान कू्ज संचालकों को कलेक्टर के आदेश का हवाला देते हुए साफ तौर पर कह दिया गया कि सूर्यास्त के बाद झील में बोटों के साथ-साथ कू्ज का संचालन भी नहीं हो सकेगा। कू्ज निधार्रित रूट बोट क्लब से कमलापार्क, केबल स्टे ब्रिज, राजा भोज प्रतिमा, करबला पंप हाउस से तकिया टापू होते हुए वापस बोट क्लब पहुंचेगा। इसका ट्रिप समय निर्धारित 45 मिनट का होगा।

बैठक के दौरान मछुआरों को निर्देश दिए कि कू्ज के रूट में मछली पकड़ने वाले जाल को नहीं लगाएं। साथ ही मत्स्य विभाग द्वारा बोट क्लब पर लगाए गए केज की टूटी रस्सियों को दुरस्त करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्णय लिया कि खराब मौसम या तूफान के दौरान किसी भी तरह की बोट का संचालन नहीं किया जाएगा।


60 पर्यटक से ज्यादा नहीं बैठा सकेंगे

कू्रज में निचले और टॉप फ्लोर मिलाकर 60 लोगों के बैठने की क्षमता है, लेकिन इसमें 80 पर्यटक तक को बैठाया जाता है। अपर आयुक्त सिंह ने कहा कि ओवर लोडिंग नहीं की जाएगी। पर्यटकों की सुरक्षा अहम है।


इसलिए बुलाई बैठक

गत रविवार को कू्रज के दो बार गलत रूट पर चलने के कारण मछली के लिए लगाए गए जाल में फंस गया। इस कारण इंजन बंद हो गया था। जिस पर जाल को काटकर कू्ज निकालने में करीब दो घंटे का समय लग गया। इस दौरान पर्यटकों को बोट के सहारे निकाला गया।

शाम को भी यही घटना हुई। कू्ज संचालकों का आरोप था कि उनके रूट पर जाल लगाया गया, जबकि मछली पालकों का कहना था कि कू्ज गलत रूट पर चलाया जाता है। रात 9 बजे तक कू्ज संचालन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।