-कल्चरल इवेंट

भारत भवन में आरंभ श्रृंखला के तहत सरोद और तबला वादन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

शनिवार की शाम भारत भवन के अंतरंग में बैठे श्रोताओं के लिए यादगार पल बन गया। मप्र और छत्तीसगढ़ की एक मात्र महिला सरोद वादिका उज्जौन की डॉ. रुचा बेड़ेकर ने अंगुलियां जब सरोद पर चलाना शुरू कीं, तो हर कोई इस संगीत की स्वर लहरियों में खो गया। यहां आरंभ श्रृंखला के अंतर्गत दूसरे दिन वादन की दो सभाएं सजीं। सबसे पहले रुचा बेड़ेकर का सरोद वादन और दूसरी मोहम्मद मुईन अल्लाहवाले का तबला वादन हुआ। वादन में अपने-अपने घरानों की परंपराओं को पेश करते इन युवा कलाकारों में कई संभावनाएं दिखीं।

वादन में स्पष्ट झलका गायकी अंग

सबसे पहले सरोद वादन की सभा सजी, जिसके लिए डॉ. रुचा मंच पर नमूदार हुईं। इमदाद खानी और सेनिया घराने की परंपरा लिए अपने गुरुओं व ईश्वर को नमन करते हुए रुचा ने राग मिया मह्लार से प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने पारंपरिक रूप से आलाप, जोड़, झाला के बाद विलंबित मध्य और द्रुत लय में बंदिशें पेश कीं। उनके वादन में अपने गुरु पंडित अरुण मोरोने और पंडित सचिन पटवर्धन की शिक्षा के साथ-साथ गायकी अंग का प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने प्रस्तुति का समापन राग खमाज में एक धुन बजाकर किया। रुचा के साथ तबले पर रामेंद्र सिंह सोलंकी ने संगत दी।

200 साल पुराने कायदे से किया सम्मोहित

दिल्ली, फर्रुखाबाद और अजराणा घरानों से संबंध रखने वाले और विरासत में मिले संगीत को तबला वादन से नये आयाम देने वाले मोहम्मद मोईन अल्लाहवाले ने अपने वादन से अपने पूर्वजों और परंपराओं की याद दिला दी। मोईन ने तबले पर तीनताल में प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने दिल्ली घराने का पेशकार और कायदा, जो करीब 200 साल पुराना था, पेश कर सभी का ध्यान तबले की ओर खींच लिया।