भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। कटारा हिल्स में किराये से रहने वाली एमबीए की छात्रा मकान मालकिन को छात्रवृति का झांसा देकर उनके चार बैंक खाते और एटीएम का उपयोग साइबर ऑनलाइन ठगी की रकम को जमा करवाने में कर रही थी। आरोपित युवती बिहार के युवक के साथ मिलकर लोगों के बैंक खातों को किराये पर लेकर उनमें ठगी की रकम को जमा करवाती थी। पुलिस ने युवती के पास से तीन बैंक की पासबुक, तीन चेक बुक, 22 एटीएम, एक मोबाइल फोन और दो सिमकार्ड जब्‍त किए हैं। साइबर पुलिस द्वारा की जा रही जांच में सामने आया है कि 12 लोगों के खाते लेकर उनका उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था। इस ठगी का सरगना फिलहाल फरार है।

साइबर क्राइम की डीएसपी नीतू ठाकुर के अनुसार कटारा हिल्स निवासी नम्रता दुधानी (21) गृहणी हैं। कुछ समय पहले उनके यहां बैतूल निवासी अंजली नामक युवती किराए से रह रही थी। दोनों में दोस्ती हो गई थी। पिछले साल अंजली ने स्कॉलरशिप मंगवाने के लिए नम्रता से उनका बैंक अकाउंट और एटीएम कार्ड मांगा था। उसने बाद में ट्रेडिंग करने के लिए बैंक अकाउंट की जानकारी मांगे। इस प्रकार नम्रता ने अक्टूबर 2020 में अपने चार बैंक अकाउंट अंजली को दिए थे। कुछ समय बाद बैंक प्रबंधन ने नम्रता को बताया कि उनके बैंक अकाउंट में गलत तरीके से ट्रांजेक्शन किए जा रहे हैं। इसकी शिकायत नम्रता ने साइबर क्राइम में की थी, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मंगलवार को अंजली को गिरफ्तार कर लिया है।

एक साल में 60 लाख का लेनदेन

छात्रा की गिरफ्तारी के बाद जप्त किए गए खातों मे एक साल में करीब 60 लाख स्र्पये का लेन-देन पाया गया है। आरोपित छात्रा पासबुक और एटीएम अपने सह-आरोपित पटना, बिहार निवासी अजय राज (परिवर्तित नाम) को देती थी। अजय को आरोपित युवती 22 एटीएम और देने वाली थी।

खातों का इंतजाम करने पर हर महीने मिलते थे 15 हजार रुपये

साइबर क्राइम पुलिस के हत्थे चढ़ी बैतूल की रहने वाली 22 वर्षीय अंजली सांकरे हर माह 15 हजार रुपये पाने के लिए बैंक खातों का इंतजाम करवा रही थी। आरोपित युवती ने अपने करीबी लोगों के दस्तावेज लेकर उनके खाते यह कहकर खुलवा डाले कि उसे ब्याज के पैसों से अपना खर्च चलाना होता है। यहां तक उसने खाताधारकों के खाते में आरोपित अजय राज उर्फ सैफ अली खान का मोबाइल नंबर तक जुड़वा दिया था। इसका फायदा उसे मिलता था, जब भी वह कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी की वारदात करता तो उसकी राशि खाते में आने के बाद वह नेटबैंकिंग की मदद से दूसरे खातों में ट्रांसफर तक कर देता था। आरोपित और युवती करीब दो साल से यह ऑनलाइन ठगी कर रही थे।

कॉल सेंटर में साथ काम कर चुके हैं दोनों

बिहार के पटना का रहने वाला आरोपित अजय राज नाम बदलने में भी माहिर है। उसने अंजली को अपना नाम सैफ अली खान बताया था। वह पटना बिहार से भोपाल में नौकरी के लिए आया था। होशंगाबाद रोड स्थित एक कॉल सेंटर में दोनों की मुलाकात हुई थी। उसके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था तो अंजली ने उसके रहने का इंतजाम कटारा हिल्स स्थित अपने किराये के मकान में करवा दिया था। इसी दौरान दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई थी।

शादी के बाद मकान मालकिन को पता चला

अंजली ने अपनी मकान मालकिन से उनके चार बैंक खाते किराये पर लिए थे। यह चारों खाते राष्ट्रीयकृत बैंक के थे। मकान मालकिन की जब शादी हुई तो वह बीना जाकर रहने लगी। इस दौरान बैंक के अफसर ने फोन कर बताया था कि वह कौन सा काम कर रही हैं कि अचानक से उनके खातों में लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा है। यह सुनकर वह भोपाल आ गईं और बैंक से जानकारी ली। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस को लिखित शिकायत कर दी थी।

परिचितों को दिया झांसा

साइबर क्राइम एएसपी अंकित जायसवाल का कहना है कि अभी मामले की जांच जारी है। मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी की तैयारी है। शुरुआती पूछताछ में आरोपित महिला ने स्वीकार किया है कि वह लोगों से खाते पहले बोलकर लेती थी, लेकिन बाद में उसने अपने दोस्त व रिश्तेदार सभी के दस्तावेज लेकर खाते खुलवाए और उनका उपयोग किया। सभी को वह यह कहती थी कि बैंक में जमा राशि से उसे ब्याज मिलता है। उसके बदले में कभी-कभार वह सही खाताधारकों भी पैसे देती थी।वह 22 एटीएम और पासबुक आरोपित को देने वाली थी। उससे पहले ही उसकी गिरफ्तारी हो गई है।

अंजली खुद ही करती थी आरोपित से संपर्क

पुलिस सूत्रों की कहना है कि अंजली जब भी इंतजाम किए गए खाते मुख्य आरोपित को भिजवाती थी, तब ही उसकी और अजय की बात होती थी। वह अपने आप फोन नहीं करता था। फोन पर बात करते समय वह इंटरनेट मीडिया माध्यम वाट्सएप कॉल का उपयोग करता था।

आरोपित बातचीत में एक्सपर्ट

आरोपित अजय राज को कॉल सेंटर में काम करने के कारण उसे बातचीत में महारत हासिल है। वह कंप्यूटर साफ्टवेयर में अच्छा खासा दखल रखता है। उसे लोगों को बातचीत के दौरान ओटीपी पूछताछ कर उनके खाते से रकम निकलने में काफी कम समय लगता था। वह एनीडेस्क एप को पीड़ित के मोबाइल में डाउनलोड करवाकर उनके मोबाइल को रिमोट की तरह इस्तेमाल करना भी जानता है।

Posted By: Ravindra Soni

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