-विसर्जन की तैयारियों को लेकर पिछले दो माह में हुई 10 बैठक, बावजूद इसके हो गया इतना बड़ा हादसा

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

गणेश मूर्ति विसर्जन को लेकर इस बार एक महीने में दो बार शांति समिति की बैठक की गई, छह फीट से ज्यादा की मूर्ती पर रोक लगाने के संबंध में कोई बातचीत नहीं की गई। यहीं कारण है कि 24-24 फीट ऊंची मूर्तियां बनी और नाव से इनका विसर्जन भी किया गया। कोई रोकने टोकने वाला नहीं था।

500 नाविकों ने कलेक्टर का किया घेराव

मूर्तियों के विसर्जन के लिए घाटों से नावों में रखकर तालाब में विसर्जित कराने के दाम तय किए गए थे, लेकिन इनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हुए। बता दें कि पिछले साल नाविक संघ के अध्यक्ष चिमनलाल बाथम ने एडीएम से मिलकर मांग की थी कि विसर्जन घाटों में रहने वाले नाविकों को पहचान पत्र बनाकर दिया जाए लेकिन आज तक इस मांग को पूरा नहीं किया गया। हालांकि 10 फीट से बड़ी मूर्तियां विसर्जित करने के लिए 700 रुपए की राशि तय कर दी गई थी। इधर, शुक्रवार को दो नाविकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर नाविक संघ के लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नाविकों की कोई गलती नहीं थी उन पर एफआईआर नहीं दर्ज की जानी चाहिए।

इन बिंदुओं पर होगी न्यायिक जांच

- जांच के तहत मृत्यु की सूचना पुलिस को कब प्राप्त हुई?

- पुलिस द्वारा तत्समय क्या कार्यवाही की गई?

- घटना किन परिस्थितियों में घटित हुई?

- क्या घटना के लिए कोई जिम्मेदार है?

- विसर्जन के दौरान ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए थे?

- क्या मृत व्यक्तियों का पोस्ट मार्टम कराया गया?

- पोस्ट मार्टम की बिसरा रिपोर्ट क्या पाई गई?

- स्थानीय नागरिकों की संपूर्ण घटनाक्रम में क्या भूमिका रही?

- घटना की पुनर्रावृत्ति नहीं होने संबंधी सुझाव।