भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना की तीसरी लहर चरम पर है। ऐसे में बीमारियों से लड़ने में मदद करने वाले गिलोय और कालमेघ जैसे औषधीय पौधे की मांग फिर बढ़ गई है। लेकिन नर्सरियों में टोटा है। लोग बाहर से अधिक दाम देकर मंगवा रहे हैं। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काम आता है और कालमेघ पौधे की पत्‍तियां बुखार से छुटकारा दिलाने का काम करती हैं।

राजधानी भोपाल के बरखेड़ा पठानी इलाके में औषधीय पौधे की एकमात्र नर्सरी है। यहां 200 प्रकार के पौधे हैं, जो आमजन के लिए उपलब्ध रहते हैं। इन पौधों को खरीदकर उपयोग किया जा सकता है। नर्सरी प्रभारी केवीएस परिहार का कहना है कि बीते डेढ़ वर्ष में सबसे अधिक गिलोय की मांग रही है। गिलोय के 2500 से अधिक पौधे बेच चुके हैं। अब कोरोना की तीसरी लहर के बीच फिर से मांग बढ़ गई है जो पूरी नही कर पा रहे हैं। गिलोय को तैयार कर रहे हैं। अभी समय लगेगा। गिलोय बहुपयोगी है।

केवीएस परिहार व विशेषज्ञों के मुताबिक गिलोय डायबिटीज को नियंत्रित करती है। इसका जूस ब्लड शुगर कम करती है। यह डेंगू से बचाव में भी उपयोगी है। यह अपच संबंधी समस्याओं को कम करती है। यह खांसी से छुटकारा दिलाने में मदद करती है। गिलोय के पत्तों का रस पीलिया से निजात दिलाने में मदद करता है। लोग पीलिया से लड़ने में इसका उपयोग भी करते हैं। एनीमिया से पीड़ित महिलाएं भी इसका उपयोग करती हैं। यह खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके गुण तत्वा को ताजा रखने में मदद करते हैं। गठिया रोग, अस्थमा के लिए भी यह दवा के रूप में काम आती है। केवीएस परिहार ने बताया कि लिवर फंक्शन को मजबूत बनाने के लिए गिलोय का लोग उपयोग करते हैं। वहीं इसी तरह कालमेघ भी एक औषद्यीय पौधा है जो तेज बुखार में काम आता है। यह बुखार से आराम दिलाता है। इसकी मांग भी बढ़ी है। फिलहाल कालमेघ की भी कमी है। इसे भी तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा नर्सरी में नीम, पथरचटा, अस्वगंधा, जंगली हल्दी जैसे कई तरह के पौधे हैं।

वनोपज संघ की है नर्सरी

यह नर्सरी वनोपज संघ की है। नर्सरी परिसर में ही संघ का औषधि बनाने वाला प्लांट संचालित होता है। यहां बनाई जाने वाली दवाइयां मप्र के सभी जिलों में भेजी जाती है। आसपास के 23 राज्यों में भी यहां तैयार औषधियां उपयोग की जाती है। कोरोना संक्रमण के बाद से इन औषधीय पौधों की घरेलू मांग बढ़ी है। बीते एक वर्ष में नर्सरी से गिलोय के 2500 और कालमेघ के 1200 से अधिक पौधों की बिक्री हुई है। अधिकारियों का कहना है कि नर्सरी से कभी गिलोय समेत अन्य औषधीय पौधों की इतनी घरेलू मांग नहीं रही थी।

Posted By: Ravindra Soni

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