भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। राजधानी भोपाल में स्थित मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित गमक श्रृंखला के अंतर्गत मंगलवार को आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा सतना जिले के खजूरीताल में रहने वाले सरस कथा प्रवक्ता गुरु प्रसन्‍नदास और उनके साथियों द्वारा भक्ति संगीत की प्रस्‍तुति दी गई। इसके बाद डिंडौरी के धरमसिंह बरकड़े और साथियों ने गोंड जनजातीय बाना वादन-गायन की प्रस्तुति देते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्‍ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरु प्रसन्‍नदास एवं साथियों द्वारा भक्ति संगीत की भावविभोर करने वाली प्रस्‍तुति के साथ हुई। सर्वप्रथम गणेश वंदना के बाद श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां एवं जग में सत्संग बिना प्राणी..., सद्गति मति पाना क्या जाने..., मुझसे अधम अधीन उद्मारे न जाएंगे..., चाकर राखो जी श्याम..., बिन देखे नयनवा ना मानें..., न यूं घनश्याम तुमको... और आवा हो जग नाव खिवैया... आदि भजन प्रस्तुत किए। इन भजनों को सुन श्रोता वाह-वाह कर उठे।

गौरतलब है कि गुरु प्रसन्‍नदा स ने लगभग 11 वर्ष की आयु में गृहस्थ जीवन का वरित्याग कर महंत रामभूषण दास से विरक्त संत की दीक्षा ग्रहण की एवं संस्कृत में आचार्य तक की शिक्षा प्राप्त की। आप लगभग 45 वर्षों से रामकथा, भागवत कथा वाचन एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामलीला मंचन करते आ रहे हैं। प्रस्तुति में तबले पर नागेंद्र पाण्डे एवं घनश्याम, वायलिन पर योगेश पाण्डे, कीबोर्ड पर विवेक तिवारी और मंजीरे पर रत्नेश तिवारी ने संगत दी।

दूसरी प्रस्तुति में धरमसिंह बरकड़े और साथी, डिंडोरी ने गोंड जनजातीय आख्यान से राजा हीरा खान पर केंद्रित गाथा को पारंपरिक वाद्य यंत्र बाना के माध्यम से गाकर प्रस्तुत किया। इसे सुनकर श्रोता झूमते नजर आए।

Posted By: Ravindra Soni

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