मध्‍य प्रदेश की डायरी : संजय मिश्र

कोरोना के खिलाफ जंग में मध्‍य प्रदेश ने पूरे देश के सामने अनूठा उदाहरण पेश किया। एक दिन में सर्वाधिक टीकाकरण का रिकार्ड बनाकर उसने दिखा दिया कि इच्‍छाशक्ति से कोई भी लक्ष्‍य हासिल किया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने जिस तरह से नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की उससे पूरे देश में मध्‍य प्रदेश एक माडल के रूप में चर्चित हुआ। शहर से लेकर गांव तक सरकार की सजगता से चलाए गए जागरूकता अभियान का ही परिणाम रहा कि गुजरात जैसे राज्‍य को पीछे छोडकर मध्‍य प्रदेश ने पूरे देश में टीकाकरण में पहला स्‍थान हासिल कर लिया। इसी सजगता के कारण प्रदेश में 91 फीसद अर्थात 4.91 करोड लोगों को टीके की पहली डोज लग चुकी है। इस उपलब्धि के बावजूद हैरानी की बात है कि दूसरा डोज लगवाने को लेकर नागरिकों की बेपरवाही सरकार की चिंता बढा रही है। कोरोना संक्रमण में आयी कमी के कारण बढी निश्चिंतता ने नागरिकों को इस तरह बेपरवाह किया है कि सरकार और प्रशासन की कोशिश के बावजूद दूसरी डोज लगवाने के लिए बडी संख्‍या में लोग सामने नहीं आए। अभी तक सिर्फ 32 फीसद लोगों को ही टीके की दूसरी डोज लग पायी है।

कोरोना की दूसरी लहर ने मध्य प्रदेश सहित देश के लगभग सभी राज्‍यों में कहर बरपाया था। एक समय ऐसा भी था जब कोरोना की जांच कराने के लिए अस्पतालों में लंबी कतारें लग रही थीं। संक्रमित की संख्‍या इस कदर बढ रही थी कि गंभीर मरीजों तक के लिए अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल पा रहे थे। जरूरी दवाओं एवं इंजेक्‍शन की किल्‍लत हो गई थी। हर तरफ निराशा फैली हुई थी। ऐसे समय में कोरोना से बचाव के लिए टीका ही संजीवनी बनकर सामने आया था। वैज्ञानिकों ने स्‍पष्‍ट किया था कि कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण ही सबसे सशक्‍त तरीका है। सरकार ने इस पर जोर दिया तो टीका लगवाने वालों की लंबी कतारें लगने लगीं। घंटों कतार में लगकर लोग टीके की पहली डोज लगवा रहे थे। यह भी एक सच्‍चाई है कि टीकाकरण बढ़ा तो कोरोना का संक्रमण कम हो गया है। मई में जहां प्रदेश मे एक दिन में कोरोना मरीजों की संख्या 13000 से ऊपर तक पहुंच गई थी वहीं अब हर दिन 10 से भी कम मरीज मिल रहे हैं। इनमें भी किसी की स्थिति गंभीर नहीं होती। इसकी बड़ी वजह यही है कि प्रदेश में 18 साल से ऊपर की 5 करोड़ 49 लाख की आबादी में से 4 करोड़ 91 लाख लोगों को टीके की पहली डोज लगायी जा चुकी है। एक करोड़ 76 लाख लोगों को दोनों डोज लग चुकी है। इस तरह प्रदेश में अब तक 91 फीसद लोगों को पहली डोज जबकि 32 फीसद लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है।

टीके की पहली डोज लगाने के मामले में मध्यप्रदेश जहां देश में अव्वल है, वहीं यह हैरान करने वाली बात है कि दूसरी डोज लगाने के मामले में उसे ऐसी उपलब्धि नहीं मिल पायी है। सिर्फ 32 फीसद लोगों को दूसरी डोज लगने के कारण मध्य प्रदेश पूरे देश में पांचवें पायदान पर है। अब सरकार के सामने सभी को दोनों डोज लगाना सबसे बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि जब तक सबको दूसरी डोज नहीं लग जाती तब तक कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में सरकार ने 31 दिसंबर के पहले सभी को दोनों डोज लगाने का लक्ष्य रखा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कह चुके हैं कि सरकार अब लाकडाउन या अन्य कोई बंदिश लगाने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। लिहाजा, टीकाकरण बढ़ाकर तीसरी लहर को आने से रोकना है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि सभी लोगों को दूसरी डोज 31 दिसंबर के पहले लग जाए। इसके लिए सरकार धार्मिक-सामाजिक संस्‍थाओं एवं नागरिक संगठनों का सहयोग बढाकर लोगों को टीके की दूसरी डोज लगवाने के लिए प्रेरित कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि टीके की पहली डोज लगवाने से सुरक्षा चक्र की शुरुआत तो हो जाती है, लेकिन कोरोना से पूरी तरह से सुरक्षित रहने के लिए हर हाल में दूसरी डोज लगवाना जरूरी है। प्रदेश में मौजूदा स्थिति में करीब 30 लाख ऐसे लोग हैं जिन्होंने अवधि निकलने के बाद भी दूसरी डोज नहीं लगवाई है। इसके अलावा लगभग 50 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी दूसरी डोज लगवाने का समय अभी चल रहा है, लेकिन वे भी टीका लगवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। 31 दिसंबर तक लक्ष्य पूरा करने के लिए 5 लाख 31हजार लोगों को रोज दूसरी डोज लगाने की जरूरत है। जाहिर है कि नागरिक भागीदारी बढाने से ही यह लक्ष्‍य पूरा किया जा सकता है।

पिछले 15 दिन के आंकड़ों पर गौर करें तो रोज डेढ़ से दो लाख लोग दूसरी डोज लगवाने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे में सरकार की चिंता बढ़ गई है। रोज नई-नई रणनीति तैयार की जा रही है ताकि टीका लगवाने के लिए लोग अधिक से अधिक संख्‍या में केंद्रों पर पहुंचें। टीका नहीं लगवाने वालों को विभिन्‍न माध्‍यमों से संदेश दिए जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में मध्य प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे। इनमें से 6537 लोगों को हमने खो दिया। ऐसे में नागरिकों की बेपरवाही सरकार और प्रशासन को चिंता में डाल रही है।

Posted By: Lalit Katariya

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