भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। दिलीप बिल्डकॉन कंपनी के चेक के क्लोन बनाकर करीब 24 करोड़ रुपये की राशि निकालने की कोशिश करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। गिरोह के दस आरोपितों में से एक चरनजीत सिंह पंजाब नेशनल बैंक की टांडा उमरार शाखा का कर्मचारी है। वह अपनी बैंक आइडी का उपयोग कर खाताधारक की पूरी जानकारी जुटा लेता था। साथ ही खाते में जमा रकम से लेकर चेक पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकृत व्यक्ति के डिजिटल हस्ताक्षर चोरी कर इस गिरोह को मुहैया कर देता था। इधर, आरोपितों के पास से एसटीएफ ने पंजाब और गुजरात सरकार के दो शासकीय विभागों के क्लोन चेक बरामद भी किए हैं।

दिल्ली, यूपी और पंजाब गिरोह एक साथ हो गए थे

एसटीएफ के अफसरों का कहना है कि उत्‍तरप्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाला अंशुल राणा निवासी गजियाबाद इस गिरोह का मुखिया है, जबकि मनमीत सिंह निवासी अमृतसर पंजाब, बरिंदर सिंह निवासी अमृतसर पंजाब, सतनाम सिंह निवासी मोहाली पंजाब, परविंदर सिंह निवासी मोहाली पंजाब, शिवम यादव निवासी गोमती नगर लखनऊ, दीपक कुमार सिंह निवासी शास्त्री नगर दिल्ली, विकास कुंद्रा निवासी वजीराबाद दिल्ली, जितेंद्र सैनी निवासी गाजियाबाद उत्तर प्रदेश उसके साथी हैं। अतीत में यह सभी जेल में एक साथ बंद थे। पहले यह अलग-अलग गिरोह बनाकर वारदात करते थे। बाद में आरोपित साथ में काम करने लगे। इन्होंने पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी चरनजीत सिंह को भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया था।

बिना हलचल के खातों में भी फर्जी केवायसी

आरोपित इतने शातिर हैं कि यह बैंक में उन खातों की पहचान कर लेते थे, जिनमें पैसा तो जमा हैं, लेकिन काफी समय से अपग्रेड नहीं हो रहे हैं। वे ऐसे खातों की फर्जी केवायसी जमा करने के बाद कुछ रुपये जमा कर उसे चालू कर उपयोग करने लगते थे। साथ ही उसमें अपना एक फर्जी मोबाइल नंबर भी जोड़ देते थे। इसमें चरणजीत सिंह उनकी मदद करता था। इसी तरह हर व्यक्ति को अलग-अलग काम बांट रखे थे।

क्लोनिंग ऐसी कि बैंक अधिकारी भी नहीं पहचान पाए

एसटीएफ ने जब आरोपितों से क्‍लोन चेक बरामद किए तो उन्‍हें पहचानना बैंक अफसरों के लिए भी मुश्किल हो गया। दरअसल, क्लोनिंग एकदम सटीक थी। किसी भी एंगल से क्‍लोन चेक फर्जी नहीं लग रहा था। कागज से लेकर सिग्नेचर हुबहू कॉपी किए गए थे। अगर समय रहते कंपनी सत्यापन के बाद भुगतान नहीं रुकवाती तो आरोपित वारदात को अंजाम देने में कामयाब हो सकते थे।

Posted By: Ravindra Soni

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