धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। उपचुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद पदाधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस में असंतोष सतह पर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव की खंडवा लोकसभा सीट के उपचुनाव में टिकट की दावेदारी का विवाद और चुनाव में पराजय के बाद अब उनके समर्थक पदाधिकारियों को हटाने को लेकर उनकी कमल नाथ से तकरार की चर्चाएं हैं। यादव प्रदेश में पार्टी का प्रमुख पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) चेहरा हैं। कमल नाथ ने यादव गुट पर हार का ठीकरा फोड़ते हुए गुरुवार को खंडवा नगर व ग्रामीण और बुरहानपुर नगर व ग्रामीण कांग्रेस के चार जिलाध्यक्षों को हटा दिया। ये अरुण यादव के समर्थक माने जाते हैं। अब जवाब में यादव खरगोन जिले के खलघाट में एक बड़ा किसान सम्मेलन कर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।

अरुण यादव मूलरूप से पिछड़ा वर्ग के नेता हैं और मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। समय-समय पर वे कमल नाथ के फैसलों पर आपत्ति उठाते रहे हैं। दरअसल, वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी क्षत्रप एकजुट हुए और पार्टी का सत्ता का वनवास खत्म कराया, लेकिन कमल नाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दिग्विजय सिंह के अलावा शेष क्षत्रपों ने खुद को अलग-थलग महसूस करना शुरू कर दिया। अरुण यादव कई मुद्दों पर कमल नाथ पर टिप्पणी करते भी नजर आए। इस बीच मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिर जाने के बाद पार्टी के अंदर तेजी से समीकरण बदले और कमल नाथ पहले से ज्यादा ताकतवर होते चले गए।

इधर, अरुण यादव विभिन्न् मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते गए और तल्खी इस कदर बढ़ी कि जब खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए उन्होंने अपनी दावेदारी की चर्चाओं को हवा दी तो कमल नाथ ने दो टूक जवाब दे दिया कि उनके पास अरुण यादव की तरफ से दावेदारी की कोई बात नहीं आई है, टिकट सर्वे के आधार पर दिया जाएगा। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों के सर्वे में अरुण यादव का नाम नहीं है। यादव ने कमल नाथ के रुख को भांपते हुए टिकट की दावेदारी से खुद को पीछे हटा लिया, लेकिन खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान खासे सक्रिय रहे।

इस उपचुनाव में कांग्रेस को सफलता नहीं मिली और भाजपा ने अपनी सीट बरकरार रखी। उपचुनाव के परिणाम आने के बाद कमल नाथ के खेमे से यादव के समर्थकों द्वारा साथ न देने के आरोप सामने आते रहे। इसी क्रम में कुछ पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई कर दी गई। अब कमल नाथ की कार्रवाई के खिलाफ सियासी ताकत का प्रदर्शन करने अरुण यादव और उनके समर्थक एक बड़े किसान सम्मेलन की तैयारी में जुट गए हैं।

सम्मेलन से अपनी जमीनी ताकत का एहसास कराएंगे

माना जा रहा है कि प्रदेश की सियासत में ओबीसी और आदिवासी वर्ग को लेकर बढ़ती संभावनाओं के बीच यादव इस किसान सम्मेलन के साथ कदमताल की शुरुआत करेंगे। साथ ही कमल नाथ को अपनी जमीनी ताकत का एहसास कराएंगे। सम्मेलन के संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने बताया कि किसान, पिछड़ा वर्ग के मुद्दों को लेकर हम लगातार आवाज उठाते रहे हैं। इसी तारतम्य में खलघाट में प्रदर्शन प्रस्तावित है। हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं है, जल्द ही घोषित करेंगे।

Posted By: Prashant Pandey

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