अबरार खान, भोपाल। पूरी दुनिया में आतंकी खौफ का पर्याय बने आईएसआईएस प्रमुख बगदादी के खात्मे में एक खास प्रजाति के श्वान की बहादुरी की चर्चा भी हुई थी। यह श्वान बेल्जियन मेलिनोइस प्रजाति का था। अमरीकी सेना के खतरनाक दस्ते में शामिल इस श्वान ने पहले लादेन और अब बगदादी को मौत के दरवाजे तक पहुंचाकर ख्याति बटोरी तो पूरी दुनिया में इस नस्ल के श्वान की मांग तेजी से बढ़ी है। अधिकांश सुरक्षा एजेंसियां और सेना इन श्वानों को अपने दस्ते में शामिल करना चाहती है। इस नस्ल के चार श्वान पिछले छह माह से मध्यप्रदेश के भोपाल में प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण दे रहे अधिकारियों के मुताबिक भारत में बेल्जियन मेलिनोइस पहली बार 2011 में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में लाया गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ और एनएसजी ने आतंकवादियों और नक्सलियों तक पहुंचने के लिए इसकी मदद ली है।

अब चार बेल्जियन मेलिनोइस इन दिनों मप्र पुलिस की पुलिस प्रशिक्षण शाला (पीटीएस-डॉग) 23वीं बटालियन भदभदा, भोपाल में प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां आए चार माह के श्वान अब 10 माह के हो गए हैं और अपनी तेजी से सीखने की क्षमता के कारण प्रशिक्षण ले रहे सभी श्वानों में आगे हैं। जर्मन शेफर्ड, लेबरा और अन्य नस्लों के श्वान 10 से 12 किमी तक पैदल चल सकते हैं, वहीं बेल्जियन मेलिनोइस 25 से 30 किमी तक चल सकता है। यह 13 फीट ऊंची छलांग लगा सकता है। चूंकि यह स्वभाव से खतरनाक है इसलिए इस नस्ल को घरों में पालने की सलाह नहीं दी जाती।

डीएसपी रामबाबू पाठक के अनुसार, बेहतरीन कार्यक्षमता के कारण ही मध्यप्रदेश पुलिस में पहली बार दो बेल्जियन मेलिनोइस श्वान लाए गए हैं। नौ माह के प्रशिक्षण के बाद इन्हें संवेदनशील जिलों में तैनात किया जाएगा। बेल्जियम की इस श्वान नस्ल की विस्फोटक और मादक पदार्थ सूंघने की क्षमता अद्वितीय है। यह कभी अपना लक्ष्य नहीं भूलता। एक बार घटनास्थल पर पहुंचने के बाद वहां मिली सामग्री से यह अपने लक्ष्य को तेजी से निशाना बना लेता है। प्लेन या हेलिकॉप्टर से नीचे उतारने पर यह असहज नहीं होता। मप्र पुलिस में पहली बार शामिल होने वाले दो मादा श्वान और वन विभाग में शामिल होने वाले दो नर श्वान यहां पिछले छह माह से प्रशिक्षण ले रहे हैं।

अभी इसका लिया प्रशिक्षण

हाउस मैनर्स - आसपास की चीजों को नुकसान नहीं पहुंचाना। निश्चित जगह पर नित्यक्रिया करना।

सेंट वर्क - मादक एवं विस्फोटक पदार्थों की सूंघकर पहचान करना।

ट्रैकिंग - चोरी और तस्करी की गई चीजों को ट्रैक करना।

जंप वर्क - पतली से पतली जगह में भी जंप लगाकर अंदर चले जाना और ऊंचाई से बिना झिझक कूद जाना।

Posted By: Prashant Pandey