-ड्रामा इन सिटी

- रवींद्र भवन में नाटक 'वेनिस का सौदागर' का मंचन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

रवींद्र भवन में शुक्रवार की शाम नाटक 'वेनिस का सौदागर' का मंचन हुआ। विलियम शेक्सपियर रचित इस विश्व प्रसिद्ध नाटक की प्रस्तुति मप्र नाट्य विद्यालय के छात्रों की रही। दो घंटे 10 मिनट की इस प्रस्तुति में लाइट के साथ म्यूजिक और कॉस्ट्यूम्स में भी काफी प्रयोग किए गए हैं। शेक्सपियर के नाटकों में ड्रेस बहुत खास होती है, जिसकी बनावट और रंग से उसकी पहचान होती है। नाटक की ड्रेस को शेक्सपियरन टच के साथ-साथ मॉडर्न टच भी दिया है, ताकि आज का आभास हो। ड्रेस का टेक्सचर मॉडर्न रखा है, जिसमें महरून, मैजेंटा, गुलाबी, लाइट ग्रीन, ब्लू और ब्राउन रंग शामिल किया। इस नाटक के लिए सिंफनी म्यूजिक तैयार किया है। इस म्यूजिक में पहले नाटक तैयार होता है, इसके बाद संगीत तैयार करते हैं। फाइन ट्यूनिंग की जाती है, जिसके बाद म्यूजिक पूरी तरह से बनकर तैयार होता है। मूड के हिसाब से भी नाटक में लाइट का उपयोग हुआ है। जैसे रोमांस के लिए पिंक और ब्ल्यू लाइट से वॉटर इफैक्ट दिखाया है। निर्देशन बीपी बोस, संगीत निर्देशन गौतम घोष और वेशभूषा परिकल्पना कृति वी. शर्मा, प्रकाश परिकल्पना कमल जैन की रही।

अशंभव शर्त ने बचाई जान

वेनिस सिटी का एक युवक बैसेनियो एक व्यापारी है और पोर्शिया से प्रेम करता है। बैसेनियो धनी व्यक्ति था, लेकिन बहुत खर्चीला। वह टे्रड करने के लिए एक दूसरे देश बेलमोंट जाता है। इसके लिए वह शॉइलॉक नाम के व्यापारी से कर्ज लेता है। कर्ज लेते समय एक एग्रीमेंट साइन होता है, जिसमें लिखा जाता है कि यदि बैसेनियो कर्ज नहीं चुका पाया तो वह उसके शरीर से मीट निकाल लेगा। जब बैसेनियो कर्ज नहीं चुका पाता तो वह मीट देने को तैयार हो जाता है, लेकिन बैसेनियो की गर्लफे्रंड पोर्शिया व्यापारी शॉइलॉक के सामने शर्त रखती है कि वह मीट निकाल ले, लेकिन खून की एक बूंद भी नहीं निकलनी चाहिए। इस असंभव शर्त के कारण अंत में शॉइलॉक कर्ज की वसूली नहीं करता है।