-ड्रामा इन सिटी

- भारत भवन में नाटक बंदिश का मंचन, दो घंटे के नाटक का 37वां शो

-देश में ट्रोलिंग की घटनाओं को देखकर तैयार किया नाटक

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

राजा-महाराजाओं और अंग्रेजों के समय से लेकर अब तक का हमारे देश का इतिहास देखें तो 'कलाकारों' पर तरह-तरह की बंदिशें लगाई जाती रही है। कलाकार, कला के जरिए समाज को विभिन्न विषयों को लेकर जागरूक करने का प्रयास करता रहा है। बावजूद इसके समाज के ठेकेदारों की नजरों में वो हमेशा ही चुभता हुआ कंकर रहा है। भारत भवन की अतिथि नाट्य प्रस्तुति 'बंदिश' में कला और कलाकार के इसी पक्ष को प्रस्तुत किया गया। शनिवार की शाम मंचित इस नाटक का निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी पूर्वा नरेश ने किया है। वे कहती हैं पिछले कुछ सालों में ट्रोलिंग की घटनाएं बहुत बढ़ी हैं, इसे देखते हुए मैंने यह नाटक तैयार किया है। इसमें दिखाया गया है कि कलाकार को किसके साथ होना चाहिए, विचार, व्यक्ति या कला के साथ। कलाकार को अपने पर पड़ रहे दवाब से कैसे निकलना चाहिए, अपने अंदर के संघर्ष से कैसे निपटना चाहिए जिससे कला प्रभावित हो रही है। कला को रोकने वाली बंदिशों को कैसे पार करना चाहिए। दो घंटे की इस प्रस्तुति का यह 37वां शो है, जिसमें 14 कलाकारों ने अभिनय किया है।

शानदार म्यूजिक, दमदार अभिनय

इस प्रस्तुति में कैफी आजमी की रचना, नुकशे हसरत मिटा के उठना, खुशी का परचम उड़ा के उठना...बहादुर शाह जफर की नम, जा कहियो उनसे नसीम ए सहर, मेरी नींद गई मेरा चैन गया, तुझे मेरी न मुझको तुम्हारी खबर... सहित अन्य 10 नमों को शामिल किया गया है। इस प्रस्तुति में संगीत काफी खूबसूरत रहा। सेट भी काफी भव्य और खूबसूरत रहा, जो कि दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रहा। कबीर के किरदार में हितेश मलूकानी और मुन्नू के किरदार में दानिश ने काफी संजीदा रहे। अनुभा फतहपुरिया ने चंपा बाई और बेने के किरदार में निवेदिता ने शानदार अभिनय किया।

हर कलाकार का है अपना अतीत

प्रस्तुति में दिखाया गया कि नौटंकी गायिका चंपा बाई ओर बैठक गायिका बेनी केंद्र में है। सरकार बेनी, चंपा के साथ युवा गायक कबीर और मौसमी को सम्मानित करने के लिए बुलाती है। कबीर और मौसमी को सम्मानित करने के लिए बुलाती है। कबीर हाल ही में पाकिस्तान में एक शो करके लौटा है। उसे लोग एंटी नेशनलिस्ट कहकर ट्रोल कर रहे है। आयोजकों को कहना है कि तुम शो के पैसे ले लो, लेकिन प्रस्तुति नहीं करने देंगे। इसलिए वह शो करने से मना कर देता है। बेनी बाई गाना नहीं चाहती क्योंकि अंग्रेजों ने ऑल इंडिया रेडियो पर उसके गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। एक समय था जब हैदराबाद के नवाब भी उसके कद्रदान हुआ करते थे और निकाह करना चाहते थे, लेकिन वह नवाब का पाकिस्तान प्रेम देखकर मना कर देती है। यह समारोह में वह गाना चाहती है, लेकिन नौटंकी गायिका की छवि समारोह की गरिमा के अनुकूल नहीं है। मौसमी गा नहीं सकती, क्योंकि वह गायकी के मूल उपकरण वोकल कॉर्ड की जगह इलेक्ट्रॉनिक इक्यूपमेंट्स पर निर्भर है। चारों की मुलाकात ग्रीन रूम में होती है और सभी अपने-अपने अतीत में खो जाते है।