-ड्रामा इन सिटी

करुणाधाम आश्रम में नाटक 'तोत्तो-चान' का विशेष मंचन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

गुरुपूर्णिमा के मौके पर विहान के कलाकारों ने अपने चर्चित नाटक तोत्तो-चान की प्रस्तुति करुणाधाम आश्रम में दी। यहां आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में प्रस्तुत नाटक गुरुओं को समर्पित रहा। पिछले एक वर्ष में देश के विभिन्ना शहरो से लेकर गांवों तक नाटक की 30 प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। तेत्सुको कुरोयानागी द्वारा लिखित जापानी आत्मकथात्मक उपन्यास पर आधारित तोत्तो-चान का निर्देशन सौरभ अनंत ने किया है। यह एक ऐसी बच्ची की कहानी है जो अन्य बच्चों की तुलना में थोड़ी चंचल और उत्सुक है। इस कारण उसे अपने स्कूल से निकाल दिया जाता है। फिर वह अपने नए स्कूल तोमोए जाती है, जो रेल की खराब पड़ी बोगियों में लगता है। स्कूल के हेडमास्टर सोसकू कोबायाशी हैं जिन्हें सभी बच्चे बहुत प्यार करते हैं, क्योंकि वे भी बच्चों से बेहद प्यार करते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए अनूठे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। तोत्तो को ये स्कूल उसके सपनों के घर जैसा लगने लगता है। हालांकि, अंत में यह स्कूल बमबारी में नष्ट हो जाता है, लेकिन जब स्कूल जल रहा था तब भी सोसकू कोबायाशी ऐसे ही दूसरे स्कूल की कल्पना कर रहे थे।

गुरुओं के लिए सीख

नाटक की विषय वस्तु निश्चित ही आज के समय में एक जरूरी मुद्दा है जो प्राथमिक शिक्षा पद्घति पर सवाल खड़ा करती है। साथ ही यह हमें सोचने पर भी मजबूर करती है कि आज हम कैसा समाज बना रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई के प्रति कैसे जोड़ा जाए और उन्हें एक योग्य नागरिक कैसे बनाया जाए? इस नाटक की कहानी द्वितीय विश्व युद्घ के समय की वास्तविक परिस्थितियों, चिंताओं और चुनौतियों को भी हमारे सामने रखती है और फिर यह सवाल नहीं बल्कि जवाब आता है कि युद्घ में दुनिया ने क्या खोया है?

कई मायनो से विशेष रही प्रस्तुति

तोत्तो-चान के प्रस्तुतीकरण की विशेषता नाटक का विषय, कला निर्देशन, गीत, कविता और संगीत है। नाटक का संगीत निर्देशन हेमंत देवलेकर ने किया है तथा उन्हीं की कुछ बाल कविताओं को भी इस नाटक में शामिल किया गया है, जिसने नाटक की कहानी के साथ नाटक के शिल्प को भी सुंदर बनाया है। ध्वनि प्रभाव भी इस नाटक को खास बनाते हैं, जिसके लिए लगभग 20 अलग-अलग वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया गया। साथ ही इस नाटक की वेषभूषा और मेकअप इसके सौंदर्य और दृश्य अनुभव को खास बनाते हैं, जिसे श्वेता केतकर ने स्वरूप दिया है। एक और खास बात है कि इस नाटक में मुख्य किरदार निभाने वाली कलाकार तनिष्का सिर्फ 7 साल की है,जबकि बाकी सभी कलाकार उससे लगभग 12-15 साल बड़े हैं।