-ड्रामा इन सिटी

- शहीद भवन में बैले नृत्य नाटिका 'मैं कृष्ण' की प्रस्तुति

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

शहीद भवन में शनिवार को नृत्य नाटिका 'मैं कृष्ण...'की प्रस्तुति हुई। यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनके धाम लौटने तक के दृश्यों को सिलसिलेवार तरीके से दिखाकर उनकी जीवन यात्रा से रूबरू कराने का प्रयास किया गया। प्रस्तुति के लिए श्रीकृष्ण जीवन सार शिवाजी सावंत लिखित रचना युगांधर से लिया प्रस्तुत हुई इस नृत्य नाटिका के जरिए समाज को जीने की धारा और जीवन जीने और नीति-अनीति और कहा कि हम सब कृष्ण हैं व शर्ते हमें अपने को जानना और पहचानना चाहिए। वही जीवन है। एक घंटे की अवधि की इस नाटिका में वस्त्र भी कोरस फॉर्म में दिखाई दिए। इस नाटिका में पौराणिक संगीत का इस्तेमाल हुआ जिसमें मणिपुरी, संथाल स्टाइल में संगीत था और वाद्ययंत्रों में खोल, तासा, हारमोनियम, मजीरा, ढोलक, नगाड़ा, मृदंग का उपयोग किया गया। साथ ही प्रॉप्स में झंडे, धनुष, छतरी का इस्तेमाल हुआ।

दृश्यों के साथ पेश की जीवन यात्रा

प्रस्तुति के पहले दृश्य में कृष्ण जन्म, जल से संबंध और गोकुल में आने वाला दृश्य पेश किया, अगले दृश्य में बाल्य काल की लीलाओं के दृश्य रहे। अगली कड़ी में मथुरा में कंस वध, सांदीपनी आश्रम में शिक्षा के बाद फिर मथुरा में कृष्ण का स्वागत दृश्य को दिखाया। इसके बाद मथुरा में मंत्री अक्रूर वहां आते हैं और कृष्ण से कहते हैं कि आपकी वजह से जरासंध बार-बार आक्रमण कर रहा है तो आप क्या मानते हैं तो कृष्ण कहते हैं मैं मथुरा छोड़कर द्वारका चला जाऊंगा और वे द्वारका जाते हैं, जहां उनका स्वागत किया जाता है। इसके बाद रुक्मिणी का पत्र, रुक्मणि हरण के दृश्य, अंतिम में द्रोपदी के चीरहरण में कृष्ण का आना, द्वारिका में रास और पांडवों से मिला और हस्तिनापुर में शांतिदूत बनकर जाना, जैसे दृश्य रहे।