-शहीद भवन में नाटक का मंचन

अमन-चैन की खातिर छोड़ दी जवानी की मशीन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

इन दिनों कश्मीर से धारा 370 का खात्मा देश ही नहीं दुनियाभर के लिए खास खबर बनी हुई है। मगर यह खबर देशभर में रह रहे जम्मू कश्मीर के लोगों को किस कदर उत्साहित किए हुए है, इसकी बानगी देखने को मिली शनिवार को शहीद भवन में मंचित हुए नाटक एक मशीन जवानी की में, जिसका जम्मू-कश्मीर निवासी एक पात्र आखिर में धारा 370 के खात्मे से इतना खुश हो जाता है कि वह बेशकीमती वस्तु जवान करने की मशीन तक का मोह छोड़ देता है और चल देता है वापस अपने कश्मीर, जहां अब शांति है। एसएन नोटियाल द्वारा लिखित नाटक का समापन भारत माता के जयघोष के साथ होता है। एकता मप्र शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित इस नाटक का निर्देशन सुमित द्विवेदी ने किया।

-जवान बनने की तमन्नाा और हास्य

जवान बने रहना कौन नहीं चाहता और जब पता चले कि पड़ोसी के घर में ही एक ऐसी मशीन है, जो हमेशा के लिए जवान बनाए रखती है, तो जरा सोचिए कि क्या होगा। लोटपोट कराते कथानक के माध्यम से जब शनिवार की शाम नाटक अजब मशीन की गजब कहानी का मंचन शहीद भवन में हुआ तो दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

नाटक की कहानी

एक प्रोफेसर के घर से कबाड़ में उम्र कम कर देने वाली बिगड़ी मशीन लेकर आया कल्लन कबाड़ी उसमें थोड़ा बहुत खर्चा कर वह उसे काम करने लायक बना देता है। मशीन का पहला ट्रायल कल्लन कबाड़ी उसकी बूढ़ी पत्नी हुस्ना पर करता है, जिसको वह जवान बना देता है, लेकिन बात ज्यादा दिन तक छिपी नहीं रहती और पड़ोसी मियां फुस्सन का बेटा अजीम भी इस राज का राजदार हो जाता है। आगे चलकर कल्लन मियां के घर के बाहर जवां होने के ख्वाहिशमंदों की कतार लग जाती है। रुपए-पैसों की बौछार होने लग जाती है।

मंच पर कलाकार

नाटक एक मशीन जवानी की में कल्लन कबाड़ी का किरदार अखिलेश वर्मा ने तो हुस्ना का किरदार नीलिमा रावल ने निभाया। आवारा युवक अजीम का किरदार संकल्प कुमार, मिर्जा का खालिद हसन, कुलसुम राशि विश्वकर्मा और प्रोफेसर का किरदार योगेश रावत ने निभाया।