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मप्र नाट्य विद्यालय में एनएसडी के वाराणसी केंद्र की पहली गोष्ठी

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

मप्र नाट्य विद्यालय में रविवार को किसी अन्य नाट्य विद्यालय के साथ पहली बार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मप्र नाट्य विद्यालय और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, वाराणसी केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में भरतमुनि के नाट्य शास्त्र की समकालीनता और उसकी उपयोगिता पर गहनता से बातचीत हुई। इस मौके पर बनारस केंद्र के निदेशक रामजी बाली और पूर्व छात्र अंकुश सिंह ने बताया कि नाट्य शास्त्र एक संपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भरतमुनि ने गागर की भांति सागर भरने का प्रयास किया है। इसके साथ ही यह जोड़ते हुए कि लोक परिस्थति अनुरूप बदलाव की संभावना है इसको और भी वृहद बना दिया है। इस मौके पर इस ग्रंथ की समरूपता को लेकर की गई व्याख्या में बहुत से उदाहरणों से इसको श्रेष्ठ बताया गया और यह समझाने का प्रयास किया कि यदि इसका ठीक से अध्ययन किया जाए तो आपका नाट्य कौशल ज्यादा निखर जाता है। उन्होंने समझाया कि यह शास्त्र कितना आगे है, इसका मालूम इसके व्यापक अध्ययन से चलता है, जिसमें आज से 2200 वर्ष पूर्व ही इसको खेल बताया था और आज भी हम इसको प्ले कहते हैं। एमपीएसडी के निदेशक आलोक चटर्जी ने अपने व्याख्यान में कहा कि आप इस ग्रंथ को कुछ इस तरह से समझें कि नाटक खेल है और खेल ही जीवन है। इसके पूर्व गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की आराधना से हुआ। विद्यालय के विद्यिार्थयों ने संगीत के साथ मां वीणावादनी की आराधना सामूहिक स्वरों के साथ की।

संस्कृत प्ले में करने-सीखने को बहुत कुछ

नाट्य विद्यालय में बनारस के निदेशक रामजी बाली ने कहा कि किसी अन्य विद्यालय के साथ हम भी ये पहली गोष्ठी कर रहे हैं। व्याख्यान देने का मेरा ये पहला मौका है, मैं संस्कृत थियेटर का पंडित नही हूं, लेकिन मुझे ये अच्छा लगता था, उसी का परिणाम रहा कि मैं आज एक विद्यालय का निदेशक बनकर यहां आप लोगों के बीच आ सका। उन्होंने कहा कि जिस कला पर हमारे यहां एक पूरा शास्त्र है, तो समझा जा सकता है कि उस दौर में यह किस उच्च स्तर पर रही होगी। उन्होंने कहा कि उस दौर का टेक्स्ट इतना मॉडर्न है कि अभिज्ञान जो नाटक है वो संपूर्ण है। भगवत अजंतो- एक लाइन में पूरी एक्टिंग थ्योरी है, जैसा इसका शील है वैसा ही इसका आचरण होगा। शकुंतला पूरी प्रकृति का एक विम्ब है, विज्ञान ने तो आज माना है कि इनमें जीवन है, जबकि कालिदास ने तो तभी लिख दिया था। अंत में विद्यार्थियों ने वक्ताओं से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी जाना।