भोपाल। ट्रेनों में उपयोग होने वाले चादर, कंबल, तौलिया और पिलो कवर की धुलाई के बाद निकलने वाले पानी को रेलवे पेड़-पौधों के लिए उपयोग कर रहा है। दरअसल, रेलवे की लॉन्ड्री में उपयोग होने वाले 50 हजार लीटर पानी का ट्रीटमेंट कर इसे लॉन्ड्री की साफ-सफाई और पेड़-पौधों में इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले इस पानी को बेकार बहा दिया जाता था। बता दें कि गंदे पानी को साफ करने के लिए रेलवे ने 32 लाख रुपए की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। पिछले एक माह से पानी को ट्रीट कर उपयोग किया जा रहा है।

भोपाल, हबीबगंज, इटारसी और बीना से चलने वाली 25 ट्रेनों का संचालन भोपाल रेल मंडल करता है। इनके एसी कोच में यात्रियों को उपयोग के लिए चादर, कंबल, तौलिए व पिलो दिए जाते हैं। बीते एक साल तक रेलवे इनकी धुलाई ठेके पर करवाता था, जिसमें कई तरह की शिकायतें आती थीं। कई बार चादर, कंबल गंदे रह जाते थे। इसे देखते हुए रेलवे ने भोपाल में लॉन्ड्री चालू की है, जहां एक साल से चादर, कंबल, तौलिए व पिलो कवर की धुलाई की जा रही है। धुलाई के लिए 24 घंटे में 50 हजार लीटर पानी खर्च होता है।

एक महीने पहले तक धुलाई से निकलने वाले पानी को बहा दिया जाता था क्योंकि पानी में कई तरह के केमिकल होते थे, जिसका उपयोग नहीं किया जा सकता था। इसे देखते हुए रेलवे ने 32 लाख रुपए की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगवाया। अब पानी का ट्रीटमेंट कर रेलवे खुद उसका उपयोग कर रहा है।

इनका कहना है

चादर, कंबल की धुलाई के बाद निकलने वाले पानी को और शुद्ध कर उसे दोबारा धुलाई करने योग्य बनाएंगे। अभी ट्रीटमेंट के बाद पानी को पेड़, पौधों व गार्डन में उपयोग कर रहे हैं।

- उदय बोरवणकर, डीआरएम, भोपाल रेल मंडल