भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

भारत में सिर्फ 20 फीसदी उधातर शैक्षणिक संस्थानों में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और आर्किटेक्चर के कोर्सों को भारत में मान्यता प्राप्त है। उसे देखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय मान्यता की प्रक्रिया को बढ़ावा देने कई एजेंसियों को इस काम में शामिल करना चाहता है। मंत्रालय ने प्रत्यायन से जुड़े इन सुधारों पर 2024 तक 1,012 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। प्रत्यायन या मान्यता लेने की प्रक्रिया को सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा। जो संस्थान लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं उनको वित्तीय सहायता, प्रोग्रामों और स्वायत्ता में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भागीदारी जैसे प्रोत्साहन दिए जाने का प्रस्ताव है।

भारत में मौजूदा समय में प्रत्यायन देने वाले दो बड़े संस्थान हैं। नेशनल असेसमेंट एंड ऐक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी) और नेशनल बोर्ड ऑफ ऐक्रेडिटेशन (एनबीए)। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुताबिक, 42,000 से ज्यादा विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्टैंडअलोन संस्थानों में सिर्फ 8,700 संस्थानों को एनएएसी द्वारा मान्यता दी जाती है,जबकि 15,000 तकनीकी प्रोग्रामों में से सिर्फ 3,050 तकनीकी प्रोग्रामों को एनबीए द्वारा मान्यता दी जाती है। 42,000 से ज्यादा उधातर शैक्षणिक संस्थानों के मानक, अनुशासन और शैक्षणिक संस्कृति में बड़ी विविधताओं पर गौर करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कई तरह के उपायों का प्रस्ताव रखा। उनमें सभी शिक्षण संस्थानों के लिए 2024 तक प्रत्यायन को अनिवार्य बनाने का कदम भी शामिल है।

Posted By: Nai Dunia News Network