भोपाल। आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा ई-टेंडर घोटाले में मंगलवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष रस्तोगी को बयान के लिए बुलाया है। साथ ही बेंगलुरु की एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड सॉफ्टवेयर कंपनी के छह अधिकारियों के भी आज ही बयान लिए जाएंगे।

घोटाले में अब तक गिरफ्तार हुए चार आरोपितों को अदालत ने छह मई तक की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। ऑनलाइन ई-टेंडर सिस्टम में छेड़छाड़ कर टेंडरों में गड़बड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए ईओडब्ल्यू की जांच में अब सरकार के आला अफसरों के बयानों का सिलसिला शुरू हो गया है।

मप्र इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक मनीष रस्तोगी को मंगलवार को बयान देने के लिए ईओडब्ल्यू में बुलाया गया है। रस्तोगी ने इस मामले का खुलासा किया था और उन्होंने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इसके आधार पर ईओडब्ल्यू को मामला सौंपा गया था। रस्तोगी अभी प्रमुख सचिव राजस्व हैं।

सॉफ्टवेयर कंपनी के अधिकारी आएंगे

सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू ने ई-टेंडर घोटाले की आरोपी एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड कंपनी के छह अधिकारियों को सोमवार को बुलाया था जिनके बयान लिए जाएंगे। इनके बयान मंगलवार को लिए जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि घोटाले की जांच में अब तक कई लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं जिनके बयान लिए जाएंगे।

प्रकरण में अब तक गिरफ्तार ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स के संचालकों वरुण चतुर्वेदी, विनय चौधरी व सुमित गोलवलकर और इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के ई-टेंडर से जुड़े ओएसडी नंदकिशोर ब्रह्मे को सोमवार को जिला

अदालत में ईओडब्ल्यू के विशेष न्यायाधीश भागवत प्रसाद पांडे की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चारों को छह मई तक की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।

विभागों से मांगी टेंडरों की जानकारी

सूत्रों ने बताया कि ई-टेंडर घोटाले में ईओडब्ल्यू द्वारा सभी विभागों से टेंडरों की जानकारी मांगी जा रही है। ई-टेंडर प्रक्रिया की शुरुआत 2012 से हुई है और 2015 से अब तक के टेंडरों की जांच को ईओडब्ल्यू अपनी जांच के दायरे में लेने वाली है।

एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड और ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स से जप्त डाटा के परीक्षण के आधार पर यह जांच की जा रही है कि किन-किन टेंडरों में छेड़छाड़ की गई। ऐसे टेंडरों की वर्तमान स्थिति को लेकर विभागों से पूछताछ की जाएगी।

मामले में ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स के पहले एक अन्य कंपनी नेक्स्ट टेंडर से काम कराया जाता था और टेंडर में छेड़छाड़ की जांच की परिधि में उसके भी आने की संभावना है। ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स के संचालक पहले नेक्स्ट टेंडर कंपनी में ही काम करते थे। बाद में उन्होंने अलग कंपनी बनाई।

कहां गड़बड़ी की संभावना

- सॉफ्टवेयर कंपनी एंट्रस ई-टेंडर प्रक्रिया में एक्सल फाइल लेती थी जिसमें आसानी से छेड़छाड़ की संभावना है। पीडीएफ फाइल में टेंडर मंगाए जाने से गड़बड़ी की गुंजाइश कम होती। एंट्रस मध्यप्रदेश ही नहीं कई राज्यों की ई-टेंडर प्रक्रिया में शामिल है।


रस्तोगी के आज बयान होंगे

ई-टेंडर सिस्टम में छेड़छाड़ के पकड़े जाने पर पहली कार्रवाई करने वाले आईएएस अधिकारी मनीष रस्तोगी को बयान के लिए बुलाया है। जिन टेंडरों में छेड़छाड़ को उन्होंने पकड़ा था उनके बारे में जानकारी ली जाएगी। सिस्टम में शामिल होने वाली कंपनी एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड के छह अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।

- केएन तिवारी, महानिदेशक, ईओडब्ल्यू