भोपाल। सालों पुरानी परंपरा निभाते हुए भोपाल के किन्नर ने शनिवार को भुजरिया पर्व मनाया। सज-धजकर किसी फिल्मी अदाकारा की तरह जब किन्नर नाचते-गाते, ठुमके लगाते सड़कों पर निकले तो उन्हें देखने हुजुम उमड़ पड़ा। जेवरों से लदे ये किन्नर सिर पर भुजरिया का कलश लिए हुए थे। नवाबी काल से चली आ रही इस परंपरा के तहत किन्नर रक्षाबंधन के बाद भुजरिया पर्व मनाते हैं और जुलूस निकालते हैं।

फिल्मी गानों और बैंडबाजों के साथ किन्नरों की टोलियों ने पारंपरिक जुलूस निकाला। उन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े। बता दें कि राजधानी में हर साल किन्नर भुजरिया निकालते हैं और ये परंपरा नवाबी शासन के समय से चली आ रही है। किन्नरों को ये जुलूस शहर के मंगलवारा, बुधवारा, तलैया, चौक बाजार, पीरगेट, रॉयल मार्केट होते हुए लालघाटी पहुंचता है। इसके बाद यहां किन्नर भुजरियों का विसर्जन करते हैं।


ये जुलूस पूरे प्रदेश में मशहूर है और उसमें शामिल होने के लिए भोपाल और आसपास के अलावा अन्य प्रदेशों के किन्नर भी भोपाल पहुंचे। किन्नर समाज के वरिष्ठजन सिर पर भुजरिया रखकर आगे चलते हैं और उनके शिष्य नाचते-गाते जश्न मनाते हुए चलते हैं।

इतिहास बताता है कि भोपाल में बहुत साल पहले नवाबों के समय में अकाल पड़ा था। उस वक्त यहां रहने वाले किन्नरों ने मंदिरों और मस्जिदों में जाकर बारिश के लिए दुआ की थी और भुजरिया पर्व मनाया था। उनकी दुआ रंग लाई और भरपूर बारिश हुई थी। तब से लगातार भोपाल में किन्नर हर वर्ष बड़े स्तर पर भुजरिया पर्व का आयोजन करते आ रहे हैं। इस जुलूस के मद्देनजर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए।