भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। राजधानी भोपाल में महिला काव्य मंच की शहर इकाई द्वारा सोमवार को ऑनलाइन मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें समसामयिक विषय पर सभी प्रतिभागियों ने बेहतरीन रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कीर्ति श्रीवास्तव ने वीणापाणी की सुमधुर वंदना से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रीति प्रवीण खरे ने की व सारस्वत अतिथि के रूप में शशि बंसल गोयल उपस्थित रहीं।

इस गोष्ठी का संयोजन साधना श्रीवास्तव ने किया। गोष्‍ठी के दौरान प्रीति प्रवीण खरे ने कहा कि साहित्यकार को हमेशा समाज में बदलाव के लिए अपनी लेखनी चलानी चाहिए।

इन पंक्तियों को मिली सराहना: गोष्ठी में लीना वाजपेई ने जिंदगी मोहताज हो गई मोह की, ए नादान अब तो कर ले बातें स्नेह की... सुनाते हुए श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। नीति श्रीवास्तव ने मैं कहूंगी आज तुमसे, रोक सको तो रोक लो..., कीर्ति श्रीवास्तव ने कर सको तो कर लो सामना इस जहां का ,वरना कातिल हैं बहुत तेरी जां के ..., शालिनी खरे ने आदमी तो एक खिलौना है, जिंदगी एक सपन सलौना है... कविता सुनाई। इसी प्रकार प्रतिभा श्रीवास्तव ने अम्मा पान खाती थी, अत: सुपारी से हमारी भी जान-पहचान रही... सुनाते हुए श्रोताओं को दाद देने के लिए मजबूर कर दिया।

काव्य पाठ के क्रम को आगे बढ़ाते हुए जया तागड़े ने जीतकर मैं अपनों से जुदा हो जाऊंगा, मुझे जीत नहीं, मुझे हार चाहिए..., साधना श्रीवास्तव ने किसी पर हंसना न हंसाना है सबको, दूसरों के गम को हल्का बनाना है हमको...., शशि बंसल गोयल नेसीमाएं तो उसी क्षण खिंच गई थी, जन्मी थी जब ले बेटी का रूप .... और डॉ.

प्रीति प्रवीण खरे ने यादों का झरना, सपनों का झरना ,अपनों का झरना, रिश्तों का झरना, दिल में रहता है, मन में बहता है, यादों का झरना सपनों का झरना... कविता पेश की। इस मौके पर और भी महिला रचनाकार मौजूद थीं।

Posted By: Ravindra Soni

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