लॉकडाउन मैजिक

25 लाख आबादी को रोज 10 लाख लीटर दूध की जरूरत, मिल रहा सिर्फ दो लाख लीटर

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

25 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर को रोज 10 लाख लीटर से अधिक दूध की जरूरत है, लेकिन इस समय 2 लाख लीटर भी नहीं मिल रहा है। नागरिक परेशान हैं, बच्चों की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी दिक्कत होने लगी है। यह स्थिति तब है जब सरकार ने दूध की दुकानें खुली रखने के निर्देश दिए हैं। लॉकडाउन की सख्ती के कारण दूध की सप्लाई घट गई है। दूध बेचने वाले सांची पार्लरों को पुलिस डंडा दिखाकर बंद करा रही है। इसके पीछे इन पार्लर संचालकों पर किराना सामग्री बेचने के आरोप हैं। सामान्य दिनों में भोपाल सहकारी दुग्ध संघ शहर में पौने चार लाख लीटर दूध बेचता था, जो इस समय डेढ़ से दो लाख लीटर ही बिक रहा है। बाकी की सप्लाई अमूल समेत अन्य निजी ब्रांड के दूध से होती थी जो बाधित है। अब उपभोक्ता दूध नहीं मिलने से आपत्ति जता रहे हैं।

दरअसल, भोपाल में 24 घंटे में सांची सहित अन्य ब्रांड के 10 लाख लीटर दूध की खपत होती थी। इसमें से अमूल के बहुत ही सीमित पार्लर हैं। ज्यादातर दूध किराना दुकानों पर बिकता था। यही स्थिति निजी ब्रांड के दूध की है। वह भी किराना दुकानों के माध्यम से ही बिकता है, जो किराना दुकानें बंद होने के कारण नहीं बिक पर रहा है। सांची को छोड़कर दूसरे ब्रांड के दूध की सप्लाई भी बाधित है। अब दूध सप्लाई का पूरा भार 2500 से अधिक सांची पार्लर, एजेंसियों पर है। ये भोपाल सहकारी दुग्ध संघ के हैं। सरकार के निर्देशों के अनुसार ये खुले रहने हैं, लेकिन टोटल लॉकडाउन के बाद किराना दुकानें बंद होने के बाद ऑनलाइन सप्लायर व किराना व्यवसासियों ने पुलिस को शिकायत कर दी है कि सांची पार्लर वाले दूध के साथ-साथ किराना सामग्री बेच रहे हैं। इसके बाद से सांची पार्लरों को पुलिस डंडा दिखाकर बंद करा रही है। ये आरोप सांची पार्लर संचालक लगा रहे हैं। उनका कहना है कि किराना दुकान व मॉल में किराना सामग्री खत्म हो गई है। ऐसी स्थिति में उनके पास किराना सामग्री होने का सवाल ही पैदा नहीं है। आरोप गलत है। कुछ लोग खुद के फायदे के लिए पुलिस को भ्रमित कर रहे हैं। दूध की किल्लत बढ़ने के बाद संघ के अधिकारी मंगलवार दोपहर पुलिस के पास पहुंचे हैं। उसमें भी संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद को बचाते हुए जूनियर अधिकारियों को सामने कर दिया है।

विशेषज्ञों ने ये दी सलाह

- दुग्ध महासंघ के पूर्व चेयरमैन सुभाष मांडगे ने कहा कि सांची पार्लर संचालकों को पूरी छूट दी जाए। ऐसे समय में उन्हें होने वाले नुकसान की प्रशासन भरपाई करें। जब किराना सामग्री स्टॉक में खत्म हो गई है तो उन पर गलत आरोप न लगाए जाएं।

- भोपाल सहकारी दुग्ध संघ के पूर्व संचालक बलराम बारंगे ने कहा कि बहुत दि-तें आ रही हो तो संघ होम डिलेरी चालू करें। नागरिकों के लिए क्षेत्रवार संपर्क नंबर जारी कर उस क्षेत्र में वाहन भेजे जाएं, ताकि सप्लाई में दि-त न हो।

संघ की ये कमियां

- निरंतर सप्लाई के लिए ठोस योजना नहीं है। क्षेत्रवार अधिकारियों के संपर्क नंबर जारी नहीं किए। उपभोक्ता अपने स्तर पर परेशान हैं।

- पार्लर संचालकों की तरफ से पहले ही पुलिस से पूर्व में ही पुलिस व जिला प्रशासन से समन्वय बनाने में देरी की।

- अकेले सांची दूध की सप्लाई दे रहे हैं। श्रीखंड, पेड़ा, रसमलाई, लस्सी, दही जैसे लगभग सभी उत्पाद बनाने बंद कर दिए हैं। पार्लर संचालकों का कहना है कि पहले से ही पार्लर चलाने में मुनाफा नहीं हो रहा था, अब उत्पाद बंद करने से अकेले दूध बेचने में नुकसान हो रहा है। अधिकारी इस बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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