भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी की मशहूर सितार वादिका स्मिता नागदेव 11 साल पहले स्विट्रलैंड (ज्यूरिक) में एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में प्रस्तुति देने के लिए गई थीं, लेकिन उनका सितार यात्रा के दौरान एयरलाइंस में डैमेज हो गया। इस कारण उन्हें ज्यूरिक में आयोजित कार्यक्रम में किराए का सितार लेकर प्रस्तुति देनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने दूसरे शहरों में होने वाले कार्यक्रम को स्थगित कर दिया। कस्तूरबा नगर निवासी स्मिता नागदेव ने टर्किश एयरलाइंस, नई दिल्ली के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में 2010 में याचिका लगाई थी। फोरम ने टिप्पणी की है कि हवाई यात्रा के दौरान यात्री के सामान की जिम्मेदारी एयरलाइंस की होती है। विदेश में एक भारतीय कलाकार की छवि धूमिल कर एयरलांइस ने सेवा में कमी की है।

अब एयरलाइंस को दो माह के अंदर सामान के वजन के प्रति किग्रा 20 यूरो डॉलर के हिसाब से हर्जाना देना होगा। साथ ही वाद व्यय 5 हजार रुपए भी चुकाना होगा। फैसला फोरम अध्यक्ष भारत भूषण श्रीवास्तव, सदस्य अनिल कुमार वर्मा व सदस्य अल्का सक्सेना की बेंच ने सुनाया। स्मिता नागदेव ने कहा कि पक्ष में फैसला आने से खुश हैं, लेकिन उन्हें उस कार्यक्रम में हुई परेशानी को आज भी नहीं भूल पाई हैं और फिर से अपील करेंगी।

फ्रांस, जर्मनी व बेल्जियम का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा

स्मिता ने बताया कि उन्हें 24 जुलाई 2008 को इंडियन एसोसिएशन ज्यूरिक की ओर ज्यूरिक में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देनी थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से ज्यूरिक के लिए टर्किश एयरलाइंस से टिकट बुक कराई थी। वे अपने सितार को फाइबर ग्लास के कवर में ले गई थी और एयरलाइंस ने उसकी चेकिंग कर बुक भी किया था। जब वे होटल में पहुंची तो उन्होंने रियाज करने के लिए सितार निकाला तो वह पूरी तरह से डैमेज हो गया था। उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए किराए पर सितार लिया और परफारर्मेंस दी। साथ ही दूसरे शहर फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम में होने वाले कार्यक्रमों को रद्द कर वापस दिल्ली लौट आईं। वे टर्किश एयरलाइंस के कार्यालय पहुंचकर वहां पर अपना सितार दिखाया, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी नहीं ली।

विदेश में भारत की छवि धूमिल हुई

स्मिता नागदेव ने बताया कि विदेश में कलाकार का नाम भारत जुड़ा होता है। ऐसे में सितार के बिना परफार्मेंस करना मुश्किल रहा। इससे विदेश में भारत की छवि धूमिल हुई। यह सितार कई साल पुराना था। जिसे फिर से पाना मुश्किल था। नया सितार तैयार कराने में 2 लाख खर्च हुए।

Posted By: Prashant Pandey