भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। अग्नि जीवन का अविभाज्य हिस्सा है यह वरदान और अभिशाप दोनों है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं। आग कहीं भी कैसे भी लग सकती है, इसलिए सुरक्षित जीवन के लिए अग्निसुरक्षा के उपायों को पूरी गंभीरता से जीवन मे अपनाना चाहिए। यह बात रविवार को ख्यात अग्निसुरक्षा विशेषज्ञ शक्ति कुमार तिवारी ने चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 75वीं आनलाइन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। कार्यशाला में ख्यात सर्जन और सामाजिक कार्यकर्ता डा. अजय मेहता एवं फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. राघवेंद्र शर्मा ने भी शिरकत की। श्री तिवारी ने कहा कि अग्निसुरक्षा को लेकर हमारे समाज में जागरूकता का नितांत अभाव है। बाढ़,भूकंप जैसी आपदाओं में मनुष्य की भूमिका नगण्य है, लेकिन आग लगने जैसी आपदाओं का सीधा संबंध मनुष्य के क्रियाकलापों एवं सुरक्षा उपायों से है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक फायर,तेल जनित अग्नि आपदा में हम पानी इसलिए डालते हैं, क्योंकि हमें अग्निशमन की तकनीकी जानकारी नही है। सरकार ने अपने स्तर पर इस मामले में तमाम प्रावधान किए हैं, लेकिन समाज में अग्निसुरक्षा को लेकर लोग लापरवाह हैं। उन्होंने बताया कि ऊंची इमारतों में बहुत से अग्नि सुरक्षा मानक हैं, लेकिन हम लाखों का घर खरीदते हैं पर अग्निसुरक्षा का ख्याल हमारे जेहन में नहीं रहता है। नामी महंगे स्कूलों में बच्‍चाें को हम दाखिल कराते हैं, लेकिन किसी भी अविभावक द्वारा स्कूल प्रबंधन से अग्निसुरक्षा के इंतजामों को लेकर कोई सवाल नहीं पूछते हंै। आपदाओं से जुड़ी जानकारी देने के लिए स्कूलों में कोई संदेशप्रद आयोजन नहीं होते हैं, जबकि हर छह महीने पर अग्निसुरक्षा से जुड़ी माकड्रिल का आयोजन किया जाना चाहिए।

पानी का उपयोग करें, मिट्टी या गोबर कभी न डालें: डा.अजय मेहता

डा. अजय मेहता ने प्राथमिक चिकित्सा को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुर्घटनाग्रस्त लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में अधिकतर मौतें होती हैं, लेकिन जागरूकता के साथ अगर प्राथमिक चिकित्सा की प्रविधि अपनाई जाए तो बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है। प्राथमिक चिकित्सा के 42 आयाम हैं जिन्हें समय,परिस्थितियों के अनुसार हम उपयोग में लाकर लोगों की जान बचा सकते हैं। डा. मेहता के अनुसार अग्निकांड में घायल लोगों को प्राथमिक चिकित्सा के रूप में पानी का उपयोग करना चाहिए। जले हुए शरीर के हिस्से में मिट्टी या गोबर का उपयोग कभी भी नहीं करना चाहिए। इलेक्ट्रिक उपकरणों से जलने वाले बधाों को ह्रदय की पंपिग करके बचाया जा सकता है। डा. मेहता ने बताया कि भोपाल के चिकित्सकों के एक समूह ने प्राथमिक उपचार और आम आदमी की भूमिका पर जमीनी अध्ययन कर एक पुस्तक जारी की है, जिन्हें अपनाकर हम आपदा पीड़ित को अस्पताल और घटनास्थल के मध्य की निर्णायक अवधि में बचा सकते हंै।

Posted By: Lalit Katariya

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