भोपाल। दूध और दूध से बनी चीजें खाने के पहले आप थोड़ा सतर्क रहें। कहीं ऐसा न हो कि यह चीजें आपकी सेहत बिगाड़ दें। वजह, दूध में यूरिया और डिटर्जेंट (कपड़ा धोने का पाउडर) की मिलावट पाई गई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) ने प्रदेश के सभी जिलों से खुले और पैक दूध के तीन महीने पहले नमूने लेकर मौके पर ही जांच की थी।

अथारिटी ने सितंबर में मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में मिलावट का खुलासा किया है। हालांकि, सुकून की बात यह है कि भोपाल में बिक रहे दूध में सिर्फ पानी की मिलावट पाई गई है। अलग-अलग जिलों में 70 से 90% नमूनों में पानी की मिलावट मिली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अफसरों ने कहा कि जानवरों को ज्यादा यूरिया वाली घास खिलाने से भी दूध में कुछ मात्रा में यूरिया आ सकती है। इसलिए इन जिलों में लीगल नमूने लेकर जांच कराई जा रही है।

इन जिलों का दूध सेहत के लिए खतरनाक

इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, अशोकनगर, भिंड, बालाघाट, होशंगाबाद, खंडवा, खरगौन, बुरहानपुर, बड़वानी और सिवनी।

ऐसी हुई जांच

एफएसएसएआई ने एक निजी लैब को देशभर मेें दूध के नमूने एक साथ जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मप्र के सभी जिलों में यह जांच की गई। हर जिले से 20 नमूने अलग-अलग क्षेत्र से लिए गए। इसमें खुला और पैक दूध दोनों था। दूध की मौके पर ही जांच की गई। इसके बाद लैब ने एफएसएसएआई को रिपोर्ट भेजी। एफएसएसआई ने मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजकर निगरानी रखने को कहा है।

सिर्फ निगरानी के लिए की गई जांच

एफएसएसएआई ने यह जांच सिर्फ निगरानी (सर्विलांस) के तौर पर कराई थी। लिहाजा यूरिया व डिटर्जेंट मिलने के बाद भी दूध बेचने वालों पर लीगल कार्रवाई नहीं की जा सकती। एफएसएसआई ने यह भी नहीं बताया है कि सैंपल कहां और किससे लिया। इसलिए विक्रेताओं को चेतावनी भी नहीं दी जा सकती।

एक्सपर्ट व्यू : किडनी खराब होने का डर

इनसे सबसे ज्यादा नुकसान किडनी को होता है। यूरिया और डिटर्जेंट में केमिकल होते हैं। इनसे आंतें खराब हो जाती हैं। दूध में मिलाया जा रहा पानी भी शुद्ध नहीं है, तो हेवी मेटल से कैंसर होने के साथ लिवर, किडनी खराब होने का डर रहता है।

-डॉ. आदर्श वाजपेयी, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन, एलएन मेडिकल कॉलेज

लीगल नमूने लिए जा रहे हैं

एफएसएसआई ने 13 जिलों में दूध के नमूनों में यूरिया और डिटर्जेंट होने की बात कही है। यह नमूने सिर्फ निगरानी के खातिर लिए गए थे। अब इन जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी लीगल नमूने ले रहे हैं, जिससे मिलावट करने वालों पर कार्रवाई की जा सके। नमूने असुरक्षित पाए जाने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

-डॉ. ब्रजेश सक्सेना, संयुक्त नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन

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