Bhopal Crime News: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। साइकिल बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन देकर ऑनलाइन भुगतान लेने की हामी भरना दो लोगों के महंगा सौदा साबित हुआ। जालसाजों ने साइकिल खरीदने की रुचि दिखाते हुए साइकिल की कीमत का भुगतान वाट्सएप के माध्यम से करने को कहा। इसके लिए जालसाज अपनी तरफ से एक क्यूआर कोड भेजकर उसे स्कैन करने के लिए बोला। क्यूआर कोड स्कैन करते ही साइकिल बेचने वालों के खाते से किस्तों में लगभग तीन लाख रुपये उड़ा लिए। दोनों ही मामलों में जालसाज के खुद को सेना से संबंधित बताया था। वारदात हनुमानगंज और पिपलानी थाना इलाके में हुईं।

हनुमानगंज थाना पुलिस के मुताबिक इब्राहिमगंज निवासी अमित पटेल दवा कारोबारी हैं। पिछले दिनों अपने बेटे की साइकिल बेचने के लिए उन्होंने ओएलएक्स पर विज्ञापन दिया था। 14 जून को सुबह 10:30 बजे एक व्यक्ति का अमित के पास फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम रवि कुमार प्रजापति बताया। रवि ने कहा कि साइकिल उसे सेना में पदस्थ अपने भाई के लिए खरीदना है। वो आपको साइकिल की कीमत का भुगतान कर देंगे। दोपहर दो बजे अमित के पास एक अलग मोबाइल नंबर से फोन आया। उसने कहा कि साइकिल के रुपये अदा करने के लिए वह वाट्सएप पर एक लिंक भेज रहा है। उसे स्कैन करने पर आपके अकाउंट में पैसा आ जाएगा। कुछ देर बाद अमित पटेल के पास वाट्सएप के माध्यम से क्यूआर कोड आया। अमित ने अपने पेटीएम वालेट से जैसे ही क्यूआर कोड स्कैन किया, उनके अकाउंट में रुपये क्रेडिट होने के बजाय डेबिट होने लगे। 14 जून को दोपहर तीन बजे से 15 जून की शाम छह बजे तक अमित के अकाउंट से किस्तों में 1,08,986 रुपये उड़ा लिए गए।

भाई-बहन के खातों से निकल गए एक लाख रुपये

उधर, पिपलानी क्षेत्र में भी ऐसी ही एक वारदात सामने आई है। पिपलानी थाना पुलिस के मुताबिक सिद्धार्थ एनक्‍लेव निवासी अदिति सिंह ने अपनी साइकिल बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन दिया था। 12 जून को अदिति के पास किसी श्रीकांत नाम के व्यक्ति ने फोन किया। उसने खुद को सेना में पदस्थ होना बताते हुए अपना परिचयपत्र भी वाट्सएप पर भेजा। साइकिल की कीमत का भुगतान करने के लिए वाट्सएप पर पेटीएम का क्यूआर कोड भेजा। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद भरोसा जताने के लिए जालसाज ने अकाउंट में 10 रुपये डाले। इसके बाद अदिति और उसके भाई अभिनय सिंह को अलग-अलग चार क्यूआर कोड भेजे। उन्हें स्कैन करने पर भाई-बहन के खातों से चार किस्तों में एक लाख रुपये निकल गए। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया है।

कैसे हुई ठगी, क्या रखें सावधानी

यदि कोई किसी वस्तु के रुपये देने के लिए क्यूआर कोड भेजे तो उसे भूलकर भी स्कैन न करें। दरअसल साइबर ठग क्यूआर कोड भेजते हैं और पे लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जिससे विक्रेता के खाते में रुपये आने के बजाय जालसाज के खाते में ट्रांसफर हो जाते हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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