- कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉकडाउन का यह भी असर

- दिन-रात सफाई, धुलाई और सैनिटाइजेशन से कचरा मुक्त हुआ शहर

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। राजधानी में लॉकडाउन का किस स्तर पर पालन हो रहा इसकी बयानगी शहर से निकलने वाले कचरे के आंकड़े बता रहे हैं। दरअसल, व्यापारिक, वाणिज्यक, फैक्ट्री व कारखाने, बस स्टैंड, रेलवे, गली-मोहल्लों में खुलने वाली दुकाने तक बंद होने के कारण शहर का कचरा 75 प्रतिशत निकलना कम हो गया है। उधर, नगर निगम द्वारा भी युद्ध स्तर पर हो रही सफाई व्यवस्था के कारण शहर की सूरत भी बदलती जा रही है। कॉलोनियों से लेकर सार्वजनिक स्थान चमचमाते दिखाई दे रहे हैं।

निगम अधिकरियों ने बताया कि शहर में रोजना करीब 800 टन कचरा निकलता है। बीते रविवार से प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर जनता कर्फ्यू के दिन से ही शहर से निकलने वाले कचरे में कमी आई है। शहर से निकलने वाले कचरे में तेजी से आई गिरावत ने गुरुवार को रिकार्ड बना दिया है। रोजना 800 टन कचरा उगलने वाला भोपाल से मजह 200 टन कचरा निकल रहा है।

- प्लास्टिक वेस्ट भी बचा मजह 7 प्रतिशत

पूरे देश में स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में प्लास्टिक फ्री सिटी शहर का भी तमगा रखा गया है। शासन-प्रशासन की रणनीति, नियम, कानून व प्रतिबंध के बाद भी शहर से प्रतिदिन 120 टन प्लास्टिक टन निकलता है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब प्लास्टिक वेस्ट का आंकड़ा मजह 8.4 टन का रह गया है। निगम अधिकारी भी शहर की सबसे बड़ी चुनौती बने प्लास्टिक वेस्ट में आई इतनी कमी को देख अचंभित हैं।

- इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट भी न के बराबर

शहर से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक वेस्ट (ई-वेस्ट) में भी भारी कमी आई है। शहर से औसतन 3 टन इलेक्ट्रानिक वेस्ट निकलता है। यह भी मजह 1 प्रतिशत से भी कम हो गया है। ई-वेस्ट की मात्रा रहवासी व व्यापारिक क्षेत्र में लगभग एक समान ही होती है। बता दें कि ई-वेस्ट में लैपटॉप व कम्प्यूटर के उपकरण, हार्ड डिस्क व बोर्ड, टीवी व अन्य उपकरण आते हैं।

- कोरोना वायरस से जंग के चलते मॉनीटरिंग व सफाई में सख्ती

शहर में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। तय रणनीति के तहत शहर में दिन-रात सफाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद धुलाई व सैनिटाइजेशन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा सैनिटाइजेशन व सफाई व्यवस्था की मॉनीटिरिंग भी गोविंदपुरा थाने के पास स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय में बनाए गए कोरोना वार रूम से हो रही है। लिहाजा आम दिनों की अपेक्षा शहर अधिक साफ दिखाई दे रहा है।

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: कचरे में कमी के यह प्रमुख कारण

- शहर के सभी छोटे-बड़े बाजार व व्यापारिक संस्था बंद है।

- औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों व फैक्ट्रियों में काम नहीं हो रहा है।

- गुमटियां, ठेले व अस्थाई दुकानें नहीं खुल रही हैं।

- रेस्टोरेंट, होटल, खाने-पीने की अन्य दुकानों पर भी सख्ती है।

- लोग घरों में हैं लिहाजा रहवासी क्षेत्र से कचरे की आवक भी कम हो गई है।

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नगर निगम का वेस्ट मैनेजमेंट

- शहर में 19 जोन के 85 वार्ड हैं।

- इस काम में 510 बड़े-छोटे वाहन लगाए गए हैं।

- प्रतिदिन निगम के करीब 6,600 सफाई कर्मचारी लगाए जाते है।

- कचरा कलेक्शन के लिए 720 रिक्से से एकत्रित किया जा रहा है।

- इस कार्य में प्रतिमाह 4 करोड़ रूपये खर्च किए जाते हैं।

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कोरोना से जंग के लिए निगम की तैयारी

- सैनिटाइजेशन के लिए 11 स्पे मशीनों का उपयोग

- हाथ से चलने वाले 58 पंपों से सैनिटाइजेशन जारी

- शहर में 14 मशीनों से हो रही फॉगिंग

- 15 छोटी हाथ से चलने वाली मशीनों से फॉगिंग

- 12 सीवेज मशीनों में स्प्रिंकल्स से सैनिटाइजेशन शुरू

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कोरोना संक्रमण को लेकर नगर निगम द्वारा लगातार सफाई व्यवस्था की जा रही है। लॉक डाउन के कारण भी शहर से निकलने वाले कचरे में भारी गिरावट आई है। सैनिटाइजेशन के अलावा सफाई व्यवस्था रात-दिन जारी है। इसकी मॉनीटरिंग भी कर रहे हैं?

- राजेश राठौर, अपर आयुक्त, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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