- 300 करोड़ रुपये राजस्व वसूली पर जोर, फिर भी खामियों पर अमल नहीं

- कराधान में ई-नगर पालिका सॉफ्टवेयर भी बना मुसीबत

- शहर में पांच लाख 50 हजार संपत्तिकर के कुल खाते

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम प्रशासन ने तंगहाली दूर करने के लिए इस वित्तीय वर्ष (2020-21) 300 करोड़ रुपये का लक्ष्य संपत्तिकर के लिए निर्धारित किया है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण निगम के अधिकारियों से लेकर जनता को भी खासी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। दरअसल, यह दिक्कत डुप्लीकेट संपत्तिकर के खातों के कारण आ रही है। बताया जा रहा है कि हर जोन में 20 से 40 प्रतिशत खाते डुप्लीकेट हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि अब तक डुप्लीकेट खातों की जानकारी ही नगर निगम प्रशासन के पास नहीं है। उधर, नगर निगम के ई-नगर पालिका सॉफ्टवेयर ने अधिकारियों की दिक्कत और बढ़ा दी है।

दरअसल, नगर निगम द्वारा अब तक बकाया वसूली के लिए जनवरी से मार्च के अंत तक ही अभियान चलाया जाता था। इस बार नगर निगम आयुक्त वीएस चौधरी कोलसानी ने नई व्यवस्था के तहत सालभर के तय लक्ष्य के आधार पर वसूली का निर्देश दिया है। प्रतिदिन राजस्व वसूली की समीक्षा भी की जा रही है। ऐसे में नगर निगम के जोनल अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है। समस्या यह बताई जा रही है कि डुप्लीकेट खातों के कारण वास्तविक मांग (एक्चुअल डिमांड) का खाका ही दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा सॉफ्टवेयर में भी तकनीकी दिक्कतों के कारण संबंधित जोन का संपत्तिकर कई गुना अधिक दिखाई दे रहा है।

ऐसे बने डुप्लीकेट खाते

नगर निगम में यह समस्या वर्ष 2011 में तब शुरु हुई, जब निकायों के कराधान को ऑनलाइन किया जा रहा था। यह खाते भी रजिस्ट्री के आधार पर अपडेट किए जाने थे, लेकिन इस काम में लापरवाही की गई। कई जोन में तो 40 हजार से अधिक डुप्लीकेट खाते हैं। इसके अलावा संपत्ति कर संबंधित गड़बड़ियों को रोकने के लिए वर्ष 2016 में जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआइएस) सर्वे भी पूरा नहीं हो पाया। जबकि यह काम वर्ष 2018 में ही पूरा हो जाना था। यह खाते भी संपत्ति को दोबारा बेचने के बाद अपडेट नहीं कराने व रजिस्ट्री में दर्ज व वास्तविक पते में अंतर होने के कारण अधिक हो गए।

यह हो रही दिक्कतें

डुप्लीकेट खाते के कारण अधिकारियों के साथ लोगों को भी परेशानी का सामना कराना पड़ रहा है। दरअसल, ऐसे कई मामले हैं जहां करदाताओं को डुप्लीकेट खाते के कारण दो-दो बार नोटिस भेजे गए। उधर, सॉफ्टवेयर में भी ऐसे नामों को खोजने में भी दिक्कतें आती है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे कई मामले हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं। इनकी वसूली हो पाना भी फिलहाल संभव नहीं है। इसके बाद भी सालों से 15 प्रतिशत अधिभार के साथ कई गुना अधिक संपत्तिकर सॉफ्टवेयर दर्शाता है।

ऐसे समझें गड़बड़ियों का गणित

मान लीजिए, आपने किसी बिल्डर से एक प्लॉट खरीदा। नगर निगम में संबंधित बिल्डर के नाम पर संपत्तिकर का खाता था। खरीददार ने इसी जमीन पर मकान बनाकर या प्लाट के नाम एक नया खाता खोल लिया। रजिस्ट्री के आधार पर वार्ड में पदस्थ अधिकारियों ने उक्त नाम पर उसी संपत्ति को नए खाते में मर्ज कर दिया। बता दें कि शहर में करीब 5 लाख 50 हजार संपत्ति कर के खाते हैं। इसमें ज्यादातर खाते रियल एस्टेट सेक्टर में खरीद के कारण डुप्लीकेट हुए।

बीते साल सिर्फ 18 प्रतिशत हुई संपत्तिकर की वसूली

संपत्तिकर को लेकर जोनल अधिकारियों की लापरवाही भी रही है। वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन माह में ही वसूली पर जोर दिया जाता था। नगर निगम अधिकारी ने बताया कि बीते साल 700 करोड़ रुपये में से करीब 140 करोड़ रुपये की वसूली की गई। लिहाजा इस बार वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही संपत्ति कर पर जोर दिया जा रहा है।

वर्जन-

डुप्लीकेट खातों को लेकर निगम प्रशासन गंभीर है। जोनल अधिकारी इनकी सूची देते हैं, फिर पड़ताल व जांच के बाद ही समस्या का निदान किया जाता है। शहर में कितने डुप्लीकेट खाते हैं, इसकी पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। जीआइएस सर्वे का काम भी जल्द पूरा होगा।

- हरेंद्र नारायण, अपर आयुक्त, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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