लाट साहब : राजधानी में कोरोना संक्रमण के बीच आम जनता अपनों को बचाने के लिए परेशान हो रही है। वहीं अस्पताल के कर्मचारी से लेकर, दवा दुकान तक एक ही जुमला आम हो गया है कि कलेक्टर से लिखवाकर लाओ तो हो जाएगा। चाहे बात शादी की अनुमति की हो, रेमडेसिविर इंजेक्शन पाने की या फिर अपने परिजनों से मिलने अस्पताल के अंदर जाने की। यह जुमला हर जगह कोरोना काल में गूंज रहा है। हैरत की बात तो यह है कि लोग जितनी आसानी से इस जुमले को बोल देते हैं, यह काम उससे कई गुना कठिन है। यही कारण है कि दवा दुकान संचालक से लेकर अस्पताल प्रबंधक तक लोगों को टरकाने के लिए इस जुमले का भरपूर इस्‍तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में एक निजी अस्पताल में मरीज के परिजनों को मिलने से वहां के सुरक्षाकर्मी ने रोका। फिर बहस हुई। बहस के बीच यह जुमला फिर सुनाई दिया।

तो बच सकती थी जान

राजधानी में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मच रही मारामारी के बीच एक अजीबो-गरीब घटना सामने आ रही है। केएल अग्रवाल जो कि ड्रग इंस्पेक्टर हैं और इन पर शहर में रेमडेसिविर इंजेक्शन वितरण की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद वे पिछले 24 घंटे से सैकड़ों रेमडेसिविर इंजेक्शन लेकर गायब हो गए हैं। उनका मोबाइल नंबर भी बंद है। वहीं कुछ रेमडेसिविर इंजेक्शन इनके द्वारा कहीं रखवा दिए गए है। यह पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर जमकर वायरल हुई तो धीरे से उनके संक्रमित होने की सूचना आई। हैरत इस बात की है कि जिस महिला पुष्पा मिश्रा ने यह पोस्ट वायरल की, उसने ही इस ड्रग इंस्पेक्टर से रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए कहा था। इसके जवाब में इंस्पेक्टर ने अपने आप को आइसोलेट करने की जानकारी दी। विभाग ने इस आधार पर इस वायरल पोस्ट का खंडन जारी किया, लेकिन तब तक महिला के पति की मौत हो चुकी थी।

सड़क पर है भीड़ तो कैसी सख्ती

राजधानी में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, इसके चलते यहां लॉकडाउन लगाया गया है। यह लॉकडाउन इस तरह लगाया गया है कि शहर में सुबह और शाम के समय चेतक ब्रिज पर या तो जाम लगता है, या रेंगता ट्रैफिक गुजरता है। जब सड़क पर भीड़ है तो फिर कैसी सख्ती बरती जा रही है, इस बात को लेकर अब तक कोई कुछ नहीं समझ पा रहा है। इधर, लॉकडाउन के नाम पर जगह-जगह सड़कें बंद कर देने से भी लोगों को लंबा घूमकर जाना पड़ रहा है। अत्यावश्यक सेवाओं के लिए भी लंबी यात्रा करनी पड़ रही है। हर जगह पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाकर जिम्मेदारी पूरी समझी जा रही है। वहीं जिस ईंटखेड़ी में अस्थाई मंडी की अनुमति प्रशासन द्वारा दी गई है, वहां तो ऐसी भीड़ मच रही है मानो कोरोना खत्म हो गया हो। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह कैसी सख्ती है?

सूने ही रह गए शिविर

राजधानी में रमजान के वक्त रोजेदारों को वैक्सीन लगाने के लिए नौ जगह शिविर का आयोजन किया। यह शिविर रोजेदारों के हिसाब से शाम सात से रात 11 बजे तक आयोजित किया जाना था, लेकिन इन शिविरों में कोई हिस्सा लेने ही नहीं पहुंचा। लिहाजा, रात 11 बजे तक खुलने की जगह नौ बजे ही शिविर बंद करना पड़ा। हैरत तो यह है कि जिन लोगों के लिए इस शिविर का आयोजन किया गया था, उन्होंने वैक्सीन लगवाने में दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। अब दोबारा कोशिश करने की बातें की जा रही हैं। इधर, जो वैक्सीनेशन शिविर शहर में नगर निगम क्षेत्रों में लगाए जा रहे हैं, वहां कॉटन और स्प्रिट का जुगाड़ वार्ड प्रभारियों को करना पड़ रहा है, जबकि वैक्सीन लगाने में किसी तरह के स्प्रिट का उपयोग नहीं किया जाना है। जानकारी के अभाव में यह फिजूलखर्ची वार्ड प्रभारियों के हर शिविर में हो रही है।

Posted By: Ravindra Soni

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