-जंबूरी मैदान में श्रीराम कथा आयोजन के आठवें दिन उमड़ा जन सैलाब

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भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

समाज में पहले भी अपराध होते थे और अब भी हो रहे हैं। इन सबके पीछे और कोई नहीं, हम ही हैं। समाज में बढ़ रही कामुकता से समाज की बर्जनाएं टूट रही हैं। म्रत्यु दंड से अपराधी को सजा या मौत भले ही मिल जाए पर अपराध कम नहीं होंगे। इसके लिए मर्यादाएं जरूरी हैं। उक्त उद्गार बुधवार को भेल जंबूरी मैदान में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन सर्पूणखा प्रसंग के दौरान कथा व्यास संत मुरलीधर महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को मर्यादा का पालन करना चाहिए। ब्रह्मचारी को वासना नहीं, उपासना की ओर देखना चाहिए। अपराध को पूर्णतः रोकने के लिए हमें समाज में मर्यादा, संस्कारों को अपनाना होगा। इसके लिए सभी बड़े बुजुर्गों को अपने बच्चों को जहां भी श्रीराम कथाएं हों, वहां पर साथ ले जाना चाहिए। चित्रकूट प्रसंग के दौरान संत महाराज ने कहा कि भगवान भरत जी के साथ अवधवासी हाथी, घोड़े, रथ, पालकी और पैदल चल रहे थे। हाथी ज्ञान का, रथ कर्म, घोड़ा योग और पालकी भक्ति और पैदल प्रेम भाव का प्रतीक है। पूरा रामचरितमानस भरत के चरित्र से भरा पड़ा है। जो भगवान का नाम जपता है, काल भी उसके अधीन हो जाता है। कथापीठ से मुरलीधर महाराज ने सरभंग ऋ षि संवाद, सीताहरण प्रसंग, जटायु और माता सबरी के श्रीराम मिलन का वृतांत विस्तार से सुनाया। कथा परायण आरती में रमेश रघुवंशी, भगवती रघुवंशी, हीरालाल गुर्जर, रीना गुर्जर, बलवंत सिंह रघुवंशी, सरस्वती रघुवंशी, विधायक चोराई छिड़वाड़ा सुजीत चौधरी रघुवंशी, अर्जुन सिंह गुना, राम सिंह, संतोष रघुवंशी जबलपुर, समाज सेवी मुकेश शर्मा, महेश मालवीय पूर्व पार्षद, मिथलेश गौर, गोकुल कुशवाह, गनपत सिंह ठाकुर, विशाल सिंह सिसोदिया, संतोष सिंह आदि मौजूद थे।

आप जीवित हैं इसका अर्थ भगवान हैः वैभव

कुछ लोगों को भगवान के होने पर भी संशय होता है। अरे तुम हंसकर बोल रहे हो, चल-फिर रहे हो, यही तो भगवान है। आप जीवित हो इसका अर्थ है कि भगवान हैं। भगवान के अस्तित्व पर संशय या अविश्वास बड़ा घातक है। संस्कारों की फसल भगवान पर विश्वास करने पर ही उगती है। उक्त उद्गार बुधवार को कोलार गेहूंखेड़ा अमराई में श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास वैभव भटेले महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र, पति-पत्नी और गुरु-शिष्य के बीच यदि संशय पैदा हो जाए तो वह बहुत घातक होता है। उन्होंने कहा कि आज नारों का युग है। नारे तो हैं, लेकिन समर्पण नहीं है। मंदिरों में जयकारे हैं, लेकिन आस्था नहीं है। मुंह देखकर जयकारे मत लगाइए। याद रहे शब्द ब्रह्म हैं। इसलिए आप मुख से क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हो, यह सब रिकॉर्ड हो रहा है। शिव शक्ति सेवाधाम समिति के संस्थापक योगेंद्रनाथ योगी ने बताया कि कथा में शैलेष खटीक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।

Posted By: Nai Dunia News Network