भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। त्रिपुष्कर समेत कई शुभ संयोगों में शक्ति की साधना का पर्व गुप्त नवरात्र गुरुवार से शुरू हो जाएगा। इस अवसर पर देवी मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। नवरात्रि में साधक विशेष आराधना करेंगे। पं. रामजीवन दुबे गुरुजी ने बताया कि साल में चार नवरात्र होते हैं। इनमें चैत्र और आश्विन महीने में प्रकट नवरात्रि होती है। वहीं, माघ और आषाढ़ महीने में आने वाली नवरात्र को गुप्त माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकम गुरूवार 30 जून से गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ है, जिसका समापन महानंदा शुक्रवार आठ जुलाई को होगा।

हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने वाली मानी गई है। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्र में की जाने वाली पूजा से कई कष्टों से मुक्ति मिलती है। गुप्त नवरात्र में देवी के नौ स्‍वरूपों और दस महाविद्याओं का पूजन-अनुष्‍ठान किया जाता है। साधक गुप्‍त नवरात्र में तांत्रिक महाविद्याओं को भी सिद्ध करने के लिए मां दुर्गा की उपासना करते हैं। इसमें साधक अपनी साधना को गोपनीय रखता है। माना जाता है कि साधना और मनोकामना को जितना गोपनीय रखा जाए, सफलता उतनी अधिक मिलती है।

गुप्त नवरात्र में यह रहेगी शुभ तिथियां

गुप्त नवरात्र के दौरान विवाह व मांगलिक कार्यों के लिए कई शुभ तिथियां रहेगी। जुलाई में शादियों की तारीख 2, 3, 5, 6, 8 रहेगी। इसमें भड़लिया नवमी का अबूझ मुहूर्त आठ जुलाई को रहेगा। इसके बाद चार माह तक शादी बंद रहेंगी। रवि योग छह दिन जुलाई में 1, 2, 3, 4, 5, 8 में रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग दो दिन 30 जून, छह जुलाई को रहेगा। पुष्य नक्षत्र 30 जून से एक जुलाई दो दिन रहेगा। त्रिपुष्कर योग पांच जुलाई को रहेगा। अमृत सिद्धि योग 30 जून को रहेगा। नवरात्र में योगों का महासंयोग बना है।

गुप्त नवरात्र घटस्थापना शुभ मुहूर्त

नवरात्रि शुरू 30 जून दिन गुरूवार कलश स्थापना मुहूर्त चौघडिय़ानुसार सुबह छह बजे से 7.30 बजे तक शुभ। सुबह 10.30 से 12 बजे तक चर, दोपहर 12 से 1.30 बजे तक लाभ, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक अमृत, शाम 4.30 से 6 बजे तक शुभ, शाम 6 से 7.30 बजे तक अमृत, रात्रि 7.30 से 9 बजे तक चर। स्थिर लग्न सुबह 8.47 से 10.59 तक सिंह लग्न, अभिजीत मुहूर्त अमृत योग में, 11. 57 से 12.50 तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त। दिन में 3.25 से 5.41 वृश्चिक लग्न, रात्रि 9.34 से 11.7 बजे तक कुंभ लग्न।

मां दुर्गा के इन स्वरूपों की होगी पूजा

गुप्त नवरात्र में मां कालिका, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती, माता बगलामुखी, मातंगी, कमला देवी के स्वरूप का पूजन किया जाएगा।

गुप्त नवरात्र में प्रयोग में आने वाली सामग्री

मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेहंदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल आदि रहेगा।

नौ देवियों की पूजा किस तारीख, दिन, योग में रहेगी 30 जून से आठ जुलाई तक

शैलपुत्री : जून 30 गुरूवार सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि, धुव्र व्याघात योग के साथ पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बना है। चंद्र दर्शन के साथ देवगुरु बृहस्पति का दिन।

ब्रह्मचारिणी : 01 जुलाई शुक्रवार रवि योग के साथ पुष्य नक्षत्र में पूजन होगा1 भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भी निकाली जाएगी।

चंद्रघंटा : 02 जुलाई शनिवार रवि योग में पूजा होगी। शादियां भी रहेंगी।

कूष्माण्डा : 03 जुलाई रविवार को रवि योग के साथ गणेश चतुर्थी व्रत के साथ पूजा होगी। रात्रि में शादियां होगी।

स्कंदमाता : 04 जुलाई सोमवार रवि योग में पूजा होगी।

कात्यायनी : 05 जुलाई मंगलवार रवि योग के साथ पुष्कर योग। पूजा एवं शादियां होगी।

कालरात्रि : 06 जुलाई बुधवार सर्वार्थसिद्धि योग में पूजा की जाएगी।

महागौरी : 07 जुलाई गुरूवार देवगुरू बृहस्पति का दिन रहेगा।

सिद्धिदात्री : 08 जुलाई शुक्रवार रवि योग में पूजा-पाठ हवन आरती प्रसाद वितरण के साथ कन्या भोजन कराके गुप्त नवरात्रि का समापन होगा।

Posted By: Ravindra Soni

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