भोपाल। नईदुनिया प्रतिनिधि। सिख धर्म के संस्थापक प्रथम पातशाह साहिब श्री गुरुनानक देव जी महान आध्यात्मिक चिंतक व समाज सुधारक थे। अपनी चार उदादियों के दौरान गुरुनानक देव विश्व के अनेक भागों में भ्रमण पर गए और मानवता के धर्म का प्रचार किया। इसी क्रम में लगभग 500 वर्ष पूर्व उनका आगमन भोपाल में भी हुआ था।

इस संदर्भ में गुरुद्वारा नानकसर हमीदिया रोड प्रबंध कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गुरुचरण सिंह अरोरा ने बताया कि राजधानी के ईदगाह हिल्स स्थित टेकरी साहिब गुरुद्वारा पर गुरुनानक देव जी की यात्रा का ठहराव हुआ था। इस दौरान एक कुष्ठ रोगी ने अपनी बीमारी से मुक्ति के लिए गुरुनानक देव से प्रार्थना की।

बात उस व्यक्ति की समझ में आ गई और गुरु के चरण पकड़ लिए

गुरुनानक जी ने पहले तो उसे समझाया कि आपके कर्म ठीक नहीं हैं, इसलिए इस बीमारी ने आपके शरीर को जकड़ लिया है। आपको अपने कर्म सुधारने होंगे। यह बात उस व्यक्ति की समझ में आ गई और गुरु के चरण पकड़ लिए। गुरुनानक देव ने पीड़ित को उठाया और अपने सेवक को आदेश दिया कि जल लाओ। सेवक तलैया स्थित गुरुद्वारे से पवित्र जल लेकर आया। उस जल को कुष्ठ रोगी के ऊपर छिटक दिया, जिससे वह व्यक्ति ठीक हो गया।

सिख धर्म के बारे में भावपूर्ण प्रवचन दिए

इस दौरान गुरुनानक देव जी ने अपने सिख धर्म के बारे में भावपूर्ण प्रवचन दिए। इसके बाद गुरुनानक देव का जत्था होशंगाबाद के लिए रवाना हो गया। प्रकाश पर्व की पूर्व संध्या पर ईदगाह हिल्स स्थित टेकरी साहिब गुरुद्वारा में सोमवार शाम 6 बजे सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने दीपदान कर अरदास की। गुरुवाणी भी सुनी।

Posted By: Hemant Upadhyay