भोपाल। 16 एवं 17 जुलाई की दरमियानी रात को चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण आषाढ़ पूर्णिमा की रात को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में धनराशि में होगा। ब्रह्म शक्ति ज्योतिष संस्थान के पंडित जगदीश शर्मा ज्योतिषाचार्य के अनुसार 149 साल बाद चंद्रग्रहण और गुरु पूर्णिमा के साथ ग्रहों का दुर्लभ योग बन रहा है। इस बार ग्रहण के समय शनि और केतु चंद्रमा के साथ धनु राशि में होंगे। इससे ग्रहण का ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र भी रहेंगे। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। इस दौरान मंगल नीच का रहेगा।

भूकंप का खतरा

प. शर्मा ने बताया कि यह ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का संकेत देता है। जनता जनार्दन में आपसी मतभेद बनेंगे। मानसिक तनाव व भूकंप आदि का खतरा भी रहेगा। 16 जुलाई की देर रात 1ः31 बजे ग्रहण का स्पर्श होगा, मध्य 3 बजे व मोक्ष रात 4ः30 बजे होगा। उन्होंने बताया कि ऐसा ही योग 12 जुलाई 1877 को 149 साल पहले बना था। जब गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी शनि केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में स्थित था। जबकि सूर्य राहु के साथ, मिथुन राशि में स्थित था। इस स्थिति के बनने से उस समय भी प्राकृतिक आपदा की मार लोगों को झेलना पड़ी थी।