Guru Purnima 2021: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र पर गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योग गुरु महेश अग्रवाल ने कहा कि गुरु शब्द का शाब्दिक अर्थ है, उच्च चेतना के मार्ग में अवरोध पैदा करने वाले अन्धकार को दूर करने वाला; सूक्ष्म अन्धकार को और अशुभ वृत्तियों को नष्ट करने वाला। लेकिन भौतिक दृष्टि से गुरु शब्द का अर्थ है, एक आध्यात्मिक शिक्षक जो आध्यात्मिक जीवन के विषय में मार्गदर्शन देता है।

योग गुरु अग्रवाल ने गुरु-शिष्य के सम्बन्ध के बारे में बताया कि जीवन की विविध वस्तुओं को समझने के लिए मनुष्य ने विभिन्न तरीकों से अपने आपको अभिव्यक्त किया है। भक्ति, करुणा, सरलता आदि श्रेष्ठ मानवीय गुणों की अनुभूति के लिए उसने स्वयं को कई रिश्तों से जोड़ रखा है; जैसे-पिता और पुत्र, पति और पत्नी, भाई और बहन, आदि। भक्ति, प्रेम और दया के विविध रूपों को समझते हुए भी उसने अनुभव किया कि अपनी पूर्णता के लिए उसे कुछ और चाहिए। इसलिए सन्त-महात्माओं ने दो व्यक्तियों के बीच एक भवातीत संबंध को प्रकट किया और वह है- गुरु और शिष्य का सम्बन्ध। यह सम्बन्ध इन्द्रियों, भावनाओं और मन की सीमाओं के भीतर नहीं है। जिस प्रकार पति-पत्नी अपनी भावनाओं का परस्पर आदान प्रदान करते हैं, उसी प्रकार गुरु भी शिष्य के साथ अपने ज्ञान, प्रेम और प्रकाश का आदान-प्रदान करता है।

अध्यात्म के आचार्य को ही गुरु कहा गया है

अग्रवाल ने कहा कि अध्यात्म के आचार्य को गुरु कहा गया है। जिस प्रकार सूर्य व चन्द्र उदित होकर दिशाओं के समस्त अंधकार का विनाश करते हैं, उसी प्रकार गुरु भी शिष्य के जीवन में अवतरित होकर उसकी प्रसुप्त प्रतिभा को जाग्रत और प्रकाशित करता है। यह सत्य सदा याद रखना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयमेव प्रकाश स्वरूप है, दिव्य है। अंधकार और अज्ञान दोनों ही भ्रम हैं। जैसे एक विक्षिप्त व्यक्ति विचित्र व्यवहार करने लगता है, उसी प्रकार मायावश हर आदमी पागलपन करता आ रहा है। फलतः हमने अपनी महानता का ज्ञान खो दिया है। हममें से प्रत्येक के भीतर असीम अंतर्शक्ति है, जिसके सम्बन्ध में हम अनजान बने हुए हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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