सुशील पांडेय, भोपाल। पद्मविभूषण सम्मान प्राप्त प्रसिद्ध कथक गुरु बिरजू महाराज का रविवार सोमवार की दरमियानी रात नई दिल्ली में निधन हो गया। 84 वर्षीय बिरजू महाराज गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थे। कथक नर्तक और गुरु के रूप में बिरजू महाराज का कई बार भोपाल आना हुआ है। उन्होंने भारत भवन में कई बार प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें मध्य प्रदेश शासन का कालिदास सम्मान भी मिला था। 1986 का यह सम्मान फरवरी 1987 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उन्हें भारत भवन में दिया था। बिरजू महाराज 1986 से 1990 तक भारत भवन के न्यासी भी रहे। भारत भवन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रेम शंकर शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1995 में आयोजित पुरुष समारोह में अंतिम बार उन्होंने भारत भवन में प्रतुति दी थी। वहीं 15 दिसंबर 2015 को नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में उन्होंने कथक की प्रस्तुति दी थी।

भोपाल में यह उनकी अंतिम प्रस्तुति थी, जिसकी प्रकाश व्यवस्था वरिष्ठ रंगकर्मी कमल जैन ने की थी। बीते छह वर्षों से वे भोपाल नहीं आए थे, लेकिन उनके शिष्य और उन्हें चाहने वाले आज भी उन्हें याद करते हैं। रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना वी अनुराधा सिंह ने बताया कि 1987 में मैंने उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी से कथक की स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था। तब बिरजू महाराज दिल्ली कथक केंद्र से जुड़े थे और अकादमी ने उन समेत दस लोगों को जज पैनल के रूप में साक्षात्कार के लिए बुलाया था। जब मैं साक्षात्कार देने गई और बताया की मैंने पीएमटी की परीक्षा भी दी है। तब बिरजू महाराज ने कहा था की तुम्हारा पीएमटी में चयन हो गया तो कथक की स्कॉलरशिप छोड़ दोगी और सीट खाली जायेगी।

तब मैंने उनसे वादा किया था कि नही ऐसा नहीं होगा। फिर मुझे कथक की स्कॉलरशिप मिली और पीएमटी में भी चयन हो गया, लेकिन मैंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़ कथक को चुना था। उन्हीं का आशीर्वाद है कि आज मैं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कथक नृत्यांगना के रूप में स्थापित हूं। अनुराधा ने बताया कि स्कॉलरशिप मिलने के बाद बिरजू महाराज हर छह महीने हमें सिखाने दिल्ली से भोपाल आते थे। उनकी क्लास भारत भवन में लगती थी। मैं वहां जीप से जाती थी। एक बार बिरजू महाराज ने मुझे जीप चलाते देखा तो बोले की तुम नृत्यांगना होकर जीप भी चला लेती हो।

लखनऊ घराने की नजाकत सीखी

शहर की कथक नृत्यांगना और रंगकर्मी सिंधु धौलपुरे ने बताया की मैंने 2017 और 2018 में बिरजू महाराज की मुंबई में दो डांस वर्कशॉप में हिस्सा लिया था। बड़ी संख्या में देश विदेश के स्टूडेंट कार्यशाला में आते थे। मैंने उनसे लखनऊ घराने की नजाकत, कई बंदिशें, भाव और बोल सीखे। इतनी भीड़ में भी गुरुजी हर शिष्य पर नजर रखते थे। वर्ष 2019 से कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद मुंबई जाना नही हो पाया, इसलिए कथक से एमए किया है। आज बिरजू महाराज के निधन की खबर ने दुखी कर दिया। कथक नृत्यांगना और गुरु लता मुंशी सिंह समेत शहर के कलाकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

Posted By: Lalit Katariya

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