भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। वन्यप्राणियों के जीने का अधिकार शिकारी छीन रहे हैं। प्रदेश में एक जवान मादा तेंदुए के साथ ऐसा ही हुआ। शिकारियों ने उसे फंदे (लोहे से बना शिकंजा) में फंसाकर उसका जीवन नर्क बना दिया। पिछले बायें पैर के पंजे की अंगुलियां टूट गई हैं, जो जुड़ नहीं सकती। वह वन विहार नेशनल पार्क में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। वन्यप्राणी विशेषज्ञों की टीम उसे बचाने में जुटी है। यदि टीम सफल भी हो गई तो भी तेंदुए को पूरी जिंदगी कैद में गुजारनी पड़ेगी। इतना ही नही, इंसानी दर्द के कारण वह मां नहीं बन पाएगी।

दरअसल, वन विहार में शुक्रवार को ग्वालियर चिड़ियाघर से एक मादा तेंदुआ लाई गई है। उसकी उम्र दो वर्ष है। उसकी हालत ठीक नहीं है। शिकारियों द्वारा लगाए गए लोहे के फंदे पर उसका पिछला बायां पैर पड़ते ही फंदे ने पंजे को फांस लिया था। घटना 18 दिसंबर को ग्वालियर सामान्य वन मंडल के शीतला माता मंदिर क्षेत्र में हुई थी। वह फंदे से छुटकारा पाने के प्रयासों में पंजे की अंगुलियां खो चुकी हैं। पंजा काम करने योग्य नहीं बचा है। पार्क में शनिवार देर शाम तक चली जांच में यह स्थिति सामने आई है, पंजे की जो बची अंगुलियां हैं, उन्हें जोड़ पाना मुश्किल है। एक तरह से उसे बचाना चुनौती है। यह बात तय हो गई है कि यदि वह बच भी गई तब भी वह खुले जंगल में शिकार करने योग्य नहीं होगी। इन्हीं कारणों के चलते उसे खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। उसकी हालत में सुधार आने के बाद वन विभाग इसकी आधिकारिक घोषणा भी करेगा।

सुअर मारने के लिए लगाए थे फंदे

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि ग्वालियर के शीतला माता मंदिर क्षेत्र से सटी वन सीमा में शिकारियों ने सुअर मारने के लिए लोहे के फंदे लगाए थे। ये जमीन के अंदर लगाए जाते हैं। ये लोहे के बने होते हैं। इनमें बाइक के क्लच वायर और स्प्रिंग का उपयोग होता है। जैसे ही इन पर दबाव पड़ता है तो ये स्वत: बंद हो जाते हैं। तेंदुए का पैर पड़ते ही फंदा बंद हो गया और उसमें पंजा फंस गया था। वन विभाग और स्थानीय लोगों की नजर पड़ने के बाद तेंदुए को पकड़ा और ग्वालियर चिड़ियाघर के बाद वन विहार शिफ्ट कर दिया है। शुरू के 12 दिन तक उसने डाइट नहीं ली थी, इसलिए बहुत कमजोर हो गया है।

शिकंजे बहुत ही खतरनाक होते हैं। ये एक बार पैर या पंजा पकड़ लें तो उसे तोड़ देते हैं। इनसे बच पाना बहुत ही मुश्किल होता है।

- रमाकांत दीक्षित, वन्यप्राणी विशेषज्ञ

Posted By: Ravindra Soni

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