भोपाल। पीएससी से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों समेत क्रीड़ा अधिकारियों और लाइब्रेरियन ने बुधवार से अपनी पसंद का कॉलेज चुनना शुरू कर दिया है। हालांकि पहले दिन ही इस प्रक्रिया में उच्च शिक्षा विभाग की एक बड़ी चूक भी सामने आई है। इसमें कॉलेज के नाम तो दिख रहे हैं, लेकिन किस कॉलेज में कितने पद खाली हैं यह असिस्टेंट प्रोफेसर, क्रीड़ा अधिकारी और लाइब्रेरियन देख ही नहीं पा रहे हैं।

इससे असिस्टेंट प्रोफेसरों, क्रीड़ा अधिकारी और लाइब्रेरियन को कॉलेज चुनने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0755-2554572 जारी किया है। कोई समस्या होने पर इस नंबर पर जानकारी मांगी जा सकती है।

दरअसल पीएससी से चयनित उच्च शिक्षा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर, क्रीड़ा अधिकारी और लाइब्रेरियन को 9 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच अपनी पसंद का कॉलेज चुनना है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसी आधार पर विभाग कॉलेजों का आवंटन करेगा। असिस्टेंट प्रोफेसरों समेत क्रीड़ा अधिकारी और लाइब्रेरियन का कहना है कि विभागीय वेबसाइट पर संबंधित विषय खोलने पर सिर्फ कॉलेजों का नाम आ रहा है। जबकि उस कॉलेज में खाली पद कितने हैं यह पता ही नहीं चल रहा है। यदि कॉलेज में खाली पदों के बारे में भी विभाग जानकारी दे देता है तो उस आधार पर कॉलेज चुनने में आसानी होगी। साथ ही हमें पसंद का कॉलेज मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। विभाग ने उन कॉलेजों के नाम सूची में जारी नहीं किए हैं जहां पद खाली नहीं है।

सूची जारी की लेकिन नहीं चुन सकेंगी कॉलेज

उच्च शिक्षा विभाग ने लोक सेवा आयोग से चयनित महिला असिस्टेंट प्रोफेसरों की सूची तो पिछले दिनों जारी कर दी है, लेकिन जबलपुर हाईकोर्ट की रोक की वजह से यह महिला असिस्टेंट प्रोफेसर अपने पंसद का कॉलेज चुनकर लॉक नहीं कर सकेंगी। यह 91 महिला असिस्टेंट प्रोफेसर आरक्षित वर्ग की हैं, लेकिन इनका चयन अनारक्षित वर्ग के पदों पर हुआ है। जबलपुर हाईकोर्ट का इस मामले में आदेश आने के बाद ही यह महिला असिस्टेंट प्रोफेसर अपने पसंद का कॉलेज लॉक कर सकेंगी। हालांकि इनका कहना है कि सभी की च्वाइस लॉकिंग एक साथ शुरू होनी चाहिए थी।

जिन लोगों ने पहले च्वाइस फिलिंग शुरू कर दी है उन्हें तो अपनी पसंद का कॉलेज मिल जाएगा। लेकिन बाद में च्वाइस फिलिंग में शामिल होने वाली महिला असिस्टेंट प्रोफेसरों को पसदं का कॉलेज मिलने की संभावना कम हो जाएगी क्योंकि उनके च्वाइस फिलिंग करने तक अधिकांश कॉलेजों में पद भरा जाएंगे।