भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि। नियमितीकरण की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों और उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के बीच रविवार को बहस हो गई। अतिथि विद्वानों ने जब मंत्री यादव से कहा कि उनके पांच साथी अब तक आत्महत्या कर चुके हैं तो वे भड़क गए। उन्होंने कह दिया कि क्या मैं भी अब आत्महत्या कर लूं, मैं इस मामले में क्या कर सकता हूं।

मंत्री इसके बाद भी नहीं रुके और अतिथि विद्वानों को फटकार लगाते रहे। ज्ञात हो कि अतिथि विद्वान महासंघ के पदाधिकारी मंत्री यादव से मिलने भोपाल में उनके चार ईमली स्थित बंगले पहुंचे थे।

इस दौरान महासंघ अध्यक्ष देवराज सिंह ने मंत्री को बताया कि अतिथि विद्वानों को नियमित नहीं किया जा रहा है। अब भी पूरे प्रदेश में करीब एक हजार ऐसे अतिथि विद्वान हैं, जिन्हें कॉलेजों में नौकरी नहीं मिल सकी है, जबकि कांग्रेस सरकार में जब अतिथि विद्वानों ने धरना दिया था तो वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धरना स्थल पर आकर उनसे मुलाकात की थी। साथ ही आश्वासन दिया था कि भाजपा की दोबारा सरकार बनते ही उनकी हर मांग को पूरा किया जाएगा, लेकिन अब मांग पूरी करना तो दूर कोई मिलना तक नहीं चाहता।

पांच अतिथि विद्वानों की आत्महत्या की बात सुनते ही मंत्री भड़क गए। कहासुनी के बाद मंत्री तो अंदर चले गए, लेकिन अतिथि विद्वान काफी देर तक बंगले के बाहर धरने पर बैठे रहे। कुछ देर बाद मंत्री ने दोबारा बाहर आकर उनसे मुलाकात की। साथ ही आश्वासन दिया कि वे विभाग स्तर से प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अब इस मामले में वे मुख्यमंत्री चौहान से चर्चा कर कोई हल निकालने की कोशिश करेंगे। महासंघ अध्यक्ष देवराज सिंह ने कहा कि फिलहाल मंत्री ने हमारी मांग पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जिसके बाद धरना खत्म कर दिया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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