भोपाल (राज्य ब्यूरो)। राजधानी सहित प्रदेश के 14 जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के मानदेय के नाम पर 26 करोड़ से अधिक के घोटाले में राजधानी के जहांगीराबाद थाने में 94 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई है। ये वह लोग हैं, जिनके बैंक खातों में घोटाले की राशि जमा कराई जाती थी। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।

इसके पहले राजधानी के आठ बाल विकास परियोजना अधिकारी और पांच लिपिकों के खिलाफ एफआइआर कराई जा चुकी है, पर संबंधितों से अब तक पुलिस ने पूछताछ भी शुरू नहीं की है। मालूम हो, इस घोटाले का राजफाश 'नवदुनिया/नईदुनिया" ने किया है। मामले की जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी तलब की है।

वर्ष 2017 में सामने आए इस मामले में अकेले भोपाल में साढ़े छह करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग के फंदा, बाणगंगा, मोतिया पार्क, चांदबड़, बरखेड़ी, गोविंदपुरा, बैरसिया और चूनाभट्टी बाल विकास परियोजना के तत्कालीन अधिकारियों, लिपिकों एवं जिले के अधिकारियों ने मिलकर सरकार को नुकसान पहुंचाया है। इन आरोपितों से पूछताछ में घोटाले की अवधि में महिला-बाल विकास संचालनालय में पदस्थ रहे कुछ अधिकारी भी जांच की जद में आ सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि घोटाले की राशि उनके परिचितों के बैंक खातों में भी जमा कराई गई है।

ऐसे करते थे गड़बड़ी

वर्ष 2014 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को मानदेय देने के अधिकार बाल विकास परियोजना अधिकारी से छीनकर जिला परियोजना अधिकारी को दे दिए गए। फिर भी आठों बाल विकास परियोजना अधिकारी ग्लोबल बजट से राशि निकालते थे और कार्यकर्ताओं के मानदेय में समायोजित कर देते थे। जबकि, कार्यकर्ताओं को जिला कार्यालय से मानदेय का भुगतान पहले ही हो जाता था।

राशि वापस करने वालों पर भी कृपा

विभाग के आला अधिकारियों ने कृपा का भाव अब तक नहीं त्यागा है। घोटाले के समय राजधानी में जिला परियोजना अधिकारी रहीं उपासरा राय पर 14 लाख 1450 की रिकवरी निकली थी। राय ने यह राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी और विभाग ने उन्हें निर्दोष मान लिया। पहले उन्हें सागर पदस्थ किया और वर्तमान में मुरैना की जिला कार्यक्रम अधिकारी हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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