भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। हनुमानजी की शपथ खाकर कहता हूं। श्री बागेश्वर धाम सरकार के पास कोई शक्ति नहीं है। कोई मंत्र साधना नहीं है। हमारे पास सिर्फ राम नाम जप है। बालाजी का ध्यान करते हैं। सन्यासी बाबा दादा गुरु का ध्यान करते हैं। बालाजी के नाम का प्रताप है। गुरुजी ने बालाजी की साधना बता रखी है। बस उसकी सेवा करते है। इसी राम नाम जप में लोगों की पर्ची खुल जाती है। यह गुरु कृपा के अलावा कुछ भी नहीं है। गुरुवार को यह बात बागेश्वर धाम सरकार के कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने मीडिया से कही।

जो राम का नहीं, वो किसी काम का नहीं

महाराज शास्त्री ने आगे कहा कि कि धर्म से राजनीति चलती है। राजनीति से धर्म नहीं। जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं। बागेश्वर धाम के दिव्य दरबार के संबंध में कहा कि जिस द्वार पर जाने के बाद दर-दर न भटकना पड़े। सभी के सभी दिन शुभ हो जाए। जो मानव के ऊपर की लीलाओं में कार्य सिद्ध हो जाए। भटका हुआ रास्ते पर आ जाए। उसी के नाम दिव्य दरबार है। सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सभी संतों का एकजुट होना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि परिवार में बागेश्वर धाम की गद्दी को लेकर चल रहे विवाद में देवेंद्र हमारे बड़े भाई हैं। हम लोगों में कोई मतभेद नहीं हैं। सिर्फ वैचारिक मतभेद था। वह भी दूर हो गया है। जो कहते कि हमने संत सेतु महाराज की आत्मा को सिद्ध कर लिया। वह बिल्कुल गलत है। हमारे दादा गुरु व सन्यासी बाबा अलग-अलग है। दादा गुरु का शरीर काशी में शांत हुआ। काशी में मरता है उसकी आत्मा मुक्त हो जाती है। हम उसे कैसे सिद्ध कर सकते हैं। क्या कोई पितृों को सिद्ध करके ऐसा कर सकता है? हमारा सिर्फ वंशानुगत दरबार लग रहा है। हमें गुरु का आशीर्वाद मिला है। हम दरबार लगाते हैं। परिवार के सदस्य भभूत वितरित करते हैं। पारिवारिक विवाद में पंडोखर की ओर से धीरेंद्र महाराज की शक्ति खत्म करने की बात पर कहा कि उन्होंने मेरे संबंध में ऐसा क्यों कहा मुझे नहीं पता। मैं कभी उनसे मिला नहीं हूं। मैं उनके बारे में कुछ नहीं कह सकता। मुझे तो सिर्फ सेवा करना है। घर-घर राम जी को पहुंचाना है। किसी से कोई बुराई नहीं है।

मंदिरों में साईं प्रतिमा को लेकर यह कहा

युवा संत पंडित धीरेंद्र शास्‍त्री ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के मंदिरों में सांई प्रतिमा के विरोध पर सहमति जताई। उन्‍होंने कहा कि शंकराचार्य जी सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर हैं। हमें उनकी आज्ञा मानना जरूरी है। इससे पहले पंचमुखी हनुमान व दुर्गा मंदिर प्रांगण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्री बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में अर्जी लगाई। 20 हजार श्रद्धालु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को सुनने पहुंचे। लोगों की अर्जियों का तत्काल महाराज ने निराकरण किया।

आयुर्वेदिक अस्पताल खोलने का सपना

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि श्री बागेश्वर धाम सरकार का पहला सपना शिवरात्रि पर निश्शुल्क कन्या विवाह का है। दूसरा सपना निश्शुल्क आयुर्वेद अस्पताल खोलने का है। इसके साथ ही देश में गुरुकुलम की स्थापना होना चाहिए। पूर्व में अंग्रेजों ने गुरुकुलम को ही समाप्त कर सनातन संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया। गुरुकुलम पद्धत्ति से विद्यार्थियों का शास्त्रमत व सात्विक विकास होता है। गुरुकुलम खत्म होने से बच्चे संस्कारों को भूल रहे हैं। बच्चों में संस्कार व संस्कृति शून्य हो गई है। पाठ्यक्रम में गीता व रामायण को जोड़ने की बात भी कही।

बुंदेलखंड में उत्खनन हो रहा है

बुंदेलखंड के 382 तालाबों पर कब्जा करने के मामले में कहा कि इसके लिए हम कदम उठाते हैं। बड़े-बड़े महापुरूष पीछे पड़ जाते हैं। बुंदेलखंड में मानसून की स्थिति वृक्षों की कटाई व भयंकर अवैध उत्खनन है। पठारी क्षेत्र में पौधरोपण की जरूरत है, लेकिन इस कार्य को कोई नहीं कर रहा है। हमने 11 लाख पौधे रोपने का संकल्प लिया है, लेकिन अभी तक सवा लाख पौधे ही रोप पाए हैं। इसमें सभी को साथ आना चाहिए।

गृहस्थ जीवन में प्रवेश के बाद ज्यादा कथाएं करेंगे

महाराज शास्त्री ने कहा कि गुरु का गृहस्थ जीवन का आदेश मिला है। गृहस्थ जीवन के बाद ज्यादा कथाएं होंगी। अभी गृहस्थ जीवन में जाने का विचार नहीं है। जब भी होगा इस संबध में सभी को अवगत कराएंगे। पाहले कई जातियां थी, लेकिन जातिवाद नहीं था। कृष्ण जी यादव थे। भगवान श्रीराम क्षत्रिय थे। सब उन्हें पूजते हैं। वाल्मीकि जी, रैदास जी को पूजा जाता है। आज सिर्फ जातिवाद है। यह जातिवाद राजनेताओं की ओर से फैलाया गया है।

Posted By: Lalit Katariya

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