भोपाल(राज्य ब्यूरो)। बैतूल में महिला वन कर्मचारियों से बदसलूकी और अपने बेटे की फीस के लिए वन कर्मचारियों से पैसे मांगने के मामले में निलंबित चल रहे वरिष्ठ आइएफएस (अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक) अधिकारी मोहन मीणा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। राज्य शासन शिवपुरी में वन अपराध में राजसात वाहनों को न्यायालय की जानकारी में लाए बगैर जुर्माना लगाकर छोड़ने, शिकारियों को बचाते हुए वन कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के मामलों में उनको आरोप पत्र जारी करने की तैयारी कर रहा है। इन मामलों की जांच रिपोर्ट करीब एक साल तक मीणा को पसंद करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने दबा रखी थी।

वर्ष 2020 में मोहन मीणा माधव नेशनल पार्क शिवपुरी के संचालक बनाए गए थे। इसके साथ ही उन्हें सिंह परियोजना कूनो पालपुर के संचालक का दायित्व भी सौंपा था। मीणा ने शिवपुरी में वन अपराधों में राजसात वाहनों को न्यायालय की जानकारी में लाए बगैर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। जबकि इन मामलों में न्यायालय में चालान पेश हो चुका था।

वहीं मीणा पर कूनो पालपुर में एक चीतल के शिकार मामले में शिकारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप भी लगा, जो जांच में सही पाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के कथन को दरकिनार करते हुए तीन मैदानी वन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। एक अन्य मामले में वर्ष 2020 में लाकडाउन के दौरान सीसीएफ पर भोपाल के कई दौरे करने और लाकबुक में काट छांट करने का भी आरोप है।

इन सभी मामलों में राज्य शासन ने मीणा को आरोप पत्र थमाने की तैयारी पूरी कर ली है। संभवत: इसी महीने उन्हें आरोप पत्र भेज दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि निलंबन अधिकारी में मीणा का मुख्यालय वन मुख्यालय रखा गया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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