India International Science Festival: भोपाल(नवदुनिया प्रतिनिधि)। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को जो स्थान प्राप्त हुआ है, उसमें विज्ञान की अहम भूमिका रही है। आज खेती-किसानी के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का महत्व बढ़ गया है। यह बात केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मंगलवार को मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी(मैनिट)में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव(आइआइएसएफ)के समापन अवसर के दौरान कही।उन्होंने कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान में रिसर्च को महत्व दिया जा रहा है। भारत सरकार ने विज्ञान को प्राथमिकता दी है।कृषि मंत्री ने बताया कि 2014 में विज्ञान का बजट दो हजार करोड़ था, जिसे अब बढ़ाकर छह हजार हजार करोड़ रूपये कर दिया गया है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं और विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने, रूचि लेने और उनमें वैज्ञानिक जागरूकता पैदा करने में सहायक बनते हैं।मप्र शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि केंद्र सरकार ने विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश के साथ ही सभी प्रदेशों की राज्य सरकारों को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने साइंस फेस्टीवल में स्टार्टअप के अवलोकन की चर्चा करते हुए कहा कि यह प्रयास पूरे देश को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा। इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के सचिव डा.एस चन्द्रशेखर, इसरो के अध्यक्ष डा. एस सोमनाथ,परिषद के महानिदेशक डा. अनिल कोठारी उपस्थित थे।

भारत अंतरिक्ष पर्यटन की दहलीज तक पहुंचा गया है

इसरो के अध्यक्ष डा. एस सोमनाथ ने कहा कि दुनिया के कुछ बड़े देशों में अंतरिक्ष पर्यटन का दौर आरंभ हो चुका है। भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी ही धरती से स्वदेशी राकेटों के जरिए अपने बनाए और अन्य देशों के उपग्रहों को अंतरिक्ष में विदा करने के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है।यही नहीं अंतरिक्ष पर्यटन (स्पेस टूरिज्म) की शुरूआत होने वाली है। यह विचार मंगलवार को मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी(मैनिट)में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव(आइआइएसएफ)के समापन अवसर पर आयोजित फेस-टू-फेस विथ न्यू फ्रंटियर्स इन साइंस कार्यक्रम में अंतरिक्ष विज्ञान विभाग के सचिव एवं इसरो के चेयरमैन डा. एस सोमनाथ ने व्यक्त किए।उनके व्याख्यान का विषय था-अंतरिक्ष के अग्रवर्ती क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ अमृतकाल की और अग्रसरज् (च्मार्चिंग टुवर्डस अमृतकाल विथ टेक्नोलाजिकल स्ट्राइडस इन फ्रंटियर्स ऑफ स्पेसज्)। उन्होंने बताया कि इसके लिए टूरिज्म वेहिकल का निर्माण किया जा रहा है। यह वाहन निजी कंपनियों की सहायता से बनाया जा रहा है। अंतरिक्ष में यात्रा का आनन्द लेने के लिए छह करोड़ रूपये खर्च करना पड़ेंगे। डॉ. सोमनाथ ने कहा कि भविष्य में अंतरिक्ष यानों को भेजने के लिए मीथेन गैस का ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जायेगा। इसके लिए नये इंजनों का निर्माण किया जा रहा है। चन्द्रमा और मंगल पर भेजे जाने वाले यानों में भी मीथेन का उपयोग किया जायेगा। दरअसल यह भविष्य का ईंधन है,जिसका इस्तेमाल कई तरह से लाभकारी रहेगा।

उन्होंने भारत के अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम की क्रमिक विकास यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में हुई रिसर्च का उद्देश्य मानव समाज की भलाई रहा है। डॉ. सोमनाथ ने जियो स्पेशियल ई-गर्वनेंस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। उन्होंने बताया कि गगन यान इसी वर्ष अंतरिक्ष में भेजा जायेगा। अंतरिक्ष विज्ञान के रणनीतिक उपयोगों का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में युद्ध कम्प्यूटर नियंत्रित होगा। साइंस मिशन की चर्चा करते हुए कहा किच्इसके अंतर्गत कई परियोजनाओं को सम्मिलित किया गया है।

डॉ. सोमनाथ ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के अवधारणा को साकार करने और अमृत काल को ध्यान में रखकर आगामी 25 वर्षों का स्पेस साइंस का रोडमैप तैयार कर लिया गया है।इस अवसर पर परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित विशिष्ट व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम को विज्ञान भारती के जनरल सेक्रेटरी प्रो. सुधीर एस. भदौरिया ने भी संबोधित किया।इन्सा के ईडी डॉ. अरविन्द रानाडे ने आठवें साइंस फेस्टीवल की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि लगभग ढाई लाख आम लोगों ने साइंस एक्सपो का अवलोकन किया। उन्होंने यह भी बताया कि आठवें आयोजन में एक साथ 1484 बच्चों ने एक साथ एग्रोरोबोट का असेम्बल कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।

Posted By: Lalit Katariya

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