International Forest Fair: भोपाल(राज्य ब्यूरो)। आपने 36 जड़ी-बूटियों से तैयार ऊर्जावर्धक च्यवनप्राश तो खाया होगा, अब महुआ और पिंड खजूर से तैयार च्यवनप्राश खाइये। मप्र में वन विभाग का उपक्रम विंध्य हर्बल महुआ-पिंडखजूर का च्यवनप्राश बाजार में उतारने जा रहा है। मधुका अवलेह के नाम से आने वाले इस अवलेह का पिछले छह महीने से परीक्षण चल रहा है और इसे 20 दिसंबर से शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय वन मेले में लांच करने की तैयारी है। फिलहाल इसे दो से तीन माह तक सुरक्षित रखकर खाया जा सकता है। इस अवधि को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह कुपोषण को दूर करने और महिलाओं से संबंधित रोगों में लाभकारी है।

औषधियों के जानकार बताते हैं कि महुआ से शराब ही नहीं बनती, इसमें आयरन, फास्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम, फैट और कार्बोहाइड्रेट आदि तत्व पाए जाते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इससे वात रोग का समन होता है और हीमोग्लोबिन बढ़ता है। भूख भी बढ़ाता है। वन विभाग के बरखेड़ा पठानी स्थित औषधि प्रसंस्करण केंद्र के अधिकारी बताते हैं कि मधुका अवलेह को मधुमेह रोगी भी ले सकते हैं क्योंकि इसमें शकर नहीं होती है। इसे दो तरह से बाजार में उतारा जा रहा है। एक सिर्फ महुआ से बना होगा और दूसरा महुआ एवं आंवले से तैयार। केंद्र के अधिकारी पिछले दिनों खालवा (खंडवा) में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेंट कर चुके हैं।

32 हजार क्विंटल महुआ का भंडार

मध्य प्रदेश में इस बार 32 हजार क्विंटल महुआ इकठ्ठा हुआ है। जिसे शीत भंडार गृह में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि महुआ की पूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है। जबकि आंवला की मांग हमेशा बनी रहती है। इस कारोबार से जुड़े वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि निजी आयुर्वेदिक कंपनियों की मांग ही मुश्किल से पूरी हो पाती है। ऐसे में च्यवनप्राश के दूसरे विकल्प तलाशने से मांग की पूर्ति भी हो पाएगी और जनता को कई वैरायटी का च्यवनप्राश भी मिल पाएगा।

पिंड खजूर के च्यवनप्राश भी खास

पिंड खजूर शारीरिक कमजोरी को दूर करने में असरकारक है। इसमें कैल्शियम, पोटेशियम जैसे पोषण तत्व पाए जाते हैं। यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण में रखता है। इसलिए इसे भी च्यवनप्राश के रूप में उतारा जा रहा है। इसके अलावा अंजीर और मुनक्का का अवलेह बनाने पर भी काम चल रहा है।

पाउच में भी मिलेगा

विंध्य हर्बल च्यवनप्राश के छोटे-छोटे पाउच तैयार कर रहा है, जो एक बार उपयोग में आएंगे। ऐसे ही शहद के पाउच भी बनाए जा रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि ऐसा करने से च्यवनप्राश और शहद की मांग बढ़ेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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