भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि )। कोरोना कॉल में हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर-नर्स सेवा की नई-नई गाथाएं लिख रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं स्टाफ नर्स प्रार्थना मसीह। करीब साल भर तक कोरोना आइसीयू और अन्य कोरोना वार्ड में ड्यूटी के बाद इस साल मार्च में वह कोरोना से संक्रमित हो गईं। सात साल की बेटी और उनके पति भी कोरोना से संक्रमित हो गए। स्वस्थ होने के बाद फिर से वह कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण में लग गई हैं।पिछले साल कोरोना की दस्तक के साथ ही उनकी ड्यूटी कोरोना आइसीयू में लग गई थी। इसके बाद से उन्होंने बिना किसी डर के अपना बचाव करते हुए कोरोना मरीजों की सेवा की। आइसीयू में ड्यूटी छह घंटे की रहती थी,लेकिन हमेशा आठ घंटे लग जाते थे। उन्होंने बताया कि कोरोना आइसीयू में गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। परिजन साथ में नहीं होते ऐसे में कुछ मरीज खाना तक नहीं खा पाते। ऐसे मरीजों को एक परिवार के सदस्य की तरह खाना भी खिलाया। मरीजों से बातचीत भी करती रहती थी जिससे उन्हें बोझिल ना लगे और वह मानसिक तौर पर परेशान ना हों।वह बताती हैं की शुरू में कोरोना ड्यूटी के बाद होटल या अतिथि गृह में सात दिन तक क्वारंटाइन रहना पड़ता था। घर नहीं जा पाते थे। इसके बाद शासन के नियम बदल गए। ड्यूटी के बाद घर जाने की अनुमति मिल गई, लेकिन बेटी से दूर ही रहते थे। इस बात की पूरी कोशिश रहती थी कि मेरी वजह से घर में सास-ससुर को कोरोना का संक्रमण ना हो। पूरी सावधानी की वजह से वह लोग अभी तक इस बीमारी से बचे हुए हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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