Interview : भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। डिजिटल मीडिया पर आज खबरों को पहले ब्रेक करने की होड़ मची है, लेकिन आगे निकलने की होड़ में खबरों की सत्यता पर भी ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं कि हड़बड़ी में कुछ भी ब्रेक कर दें। आज भी डिजिटल मीडिया से अधिक अखबारों पर लोगों को अधिक भराेसा है। इसका कारण यह है कि प्रिंट में तथ्यों पर काम किया जाता है। यह बात भोपाल एक कार्यक्रम में पहुंचे नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान(आइआइएमसी) के महानिदेशक प्रो.(डा.) संजय द्विवेदी ने कही। वे पत्रकार, संपादक, लेखक, अकादमिक प्रबंधक और मीडिया प्राध्यापक हैं। वे रायपुर, बिलासपुर, मुंबई और भोपाल में सक्रिय पत्रकारिता के बाद अकादमिक क्षेत्र से जुड़े। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 10 वर्ष जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष रहने के अलावा कुलसचिव और प्रभारी कुलपति रहे। मीडिया और राजनीतिक संदर्भों पर अब तक 25 पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है। राजनीतिक, सामाजिक और मीडिया मुद्दों पर नियमित लेखन से खास पहचान है। मीडिया के समसामयिक सवालों पर उनसे बातचीत के कुछ अंश इस प्रकार है।

सवाल- पत्रकारिता के विद्यार्थियों को आगे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

जवाब- पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डिजिटल मीडिया को समझना होगा और तेजी से अपनाना होगा। आज खबरों के सोर्स का दायरा बढ़ गया है।

सवाल- डिजिटल मीडिया आने से और ब्रेकिंग देने की जल्दबाजी से फेक न्यूज की संख्या भी बढ़ी है।

जवाब- बुरा मत टाइप करो, बुरा मत लाइक करो व बुरा मत शेयर करो, इसे अपनाना होगा। खबरों की सत्यता को परखना होगा। डिजिटल मीडिया पर जो आ रहा है। उसके तथ्यों को परखें और फिर आगे बढ़ाएं।

सवाल- आपको पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। आप इसमें किस तरह का परिवर्तन देख रहे हैं। क्या मीडिया के काम करने के तरीके में बदलाव आया है?

जवाब- हर क्षेत्र में बदलाव नजर आ रहा है। ऐसे में पत्रकारिता भी अब बहुत बदली है। टीवी और इंटरनेट आधारित मीडिया में हमने बहुत प्रगति की है। काम के तरीके में परिवर्तन आया है, तकनीक के सहारे ज्यादा काम हो रहा है, लेकिन विचार और गुणवत्ता की जगह तकनीक नहीं ले सकती। यह मानना ही चाहिए।

सवाल- एक जमाना था जब अखबार की सुर्खियां महीनों चर्चा का विषय होती थीं और अब परिस्थितियां बदली हैं, ऐसे में क्या उम्मीद की जानी चाहिए?

जवाब-आज मीडिया का आकार-प्रकार बहुत बढ़ गया है। अखबारों के पेज बढ़े हैं, संस्करण बढ़े हैं। जिले-जिले के पेज बनते हैं। टीवी न्यूज चैनल 24 घंटे समाचार देते हैं, न्यू मीडिया पल-प्रतिपल अपडेट होता है। ऐसे में खबरों की उम्र ज्यादा नहीं रहती। एक जाती है तो तुरंत दूसरी आती है। ऐसे में किसी खबर पर महीनों चर्चा हो यह संभव नहीं है। दोपहर की खबर पर शाम को चैनल चर्चा करते हैं। सुबह अखबारों में संपादकीय, विश्लेषण और लेख आ जाते हैं। इससे ज्यादा क्या चाहिए? गति बढ़ी है तो इससे सारा कुछ बदल गया है। जहां तक उम्मीद की बात है, तो भरोसा तो रखना पड़ेगा।

सवाल- आज पत्रकारों पर विज्ञापन को लेकर दबाव है। मीडिया कार्पोरेट के हाथ में है, जिसका एकमात्र उद्देश्य अधिक से अधिक फ़ायदा कमाना है। क्या ये हालात लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक नहीं है।

जवाब- इतने भारी-भरकम और खर्चीले मीडिया को कारपोरेट के अलावा कौन चला सकता है? सरकार चलाएगी तो उस पर कोई भरोसा नहीं करेगा। समाज या पाठक को मुफ्त का अखबार चाहिए। आप अगर सस्ता अखबार और पत्रिकाएं चाहते हैं तो उसकी निर्भरता तो विज्ञापनों पर रहेगी। विज्ञापन देने वाला कुछ तो अपनी भी बात रखेगा।

सवाल:- पत्रकारिता के बारे में यह मान्यता थी, विशेषकर आम लोगों में कि जब कहीं सुनवाई न हो, तब पीड़ित व्यक्ति अगर पत्रकार के पास पहुंच जाए तो उसकी समस्या का समाधान निश्चित है। क्या ये विश्वास आज गलत साबित हो रहा है?

जवाब : तीनों पालिकाओं से निराश लोग खबरपालिका के पास जाते हैं, यह सच है, लेकिन संकट तब आता है जब आप चाहते हैं आपकी लड़ाई पत्रकार या उसका प्रेस लड़े। आप सामने नहीं आएंगें। सच के लिए सबको सामने आना पड़ता है। प्रेस को, पत्रकार को समाज का भी साथ चाहिए होता है। वह कई बार नहीं मिलता।

सवाल- आप लंबे समय से पत्रकारिता शिक्षण से जुड़े हैं। क्या आपको नहीं लगता कि देश में पत्रकारिता शिक्षा को लेकर संजीदगी की आवश्यकता है।

जवाब : पूरी शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल हैं। अकेली मीडिया शिक्षा को क्यों कह रहे हैं। शिक्षा पहले तो मनुष्य बनाए, वह कौशल से जुड़े और श्रम का सम्मान करना सिखाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन विषयों को संबोधित कर रही है। हम सब भी एकात्मक और समग्र दृष्टिकोण के साथ काम करें, यह जरूरी है। इससे ही रास्ते निकलेगें।

सवाल- आगे आपका आइआइएमसी को लेकर क्या लक्ष्य है।

जवाब- संस्थान की ओर से विद्यार्थियों से लेकर अधिकारियों तक सभी को प्रशिक्षण दिया जाता है। हम दो चीजों पर ध्यान दे रहे हैं। पहला मूल्य आधारित मीडिया और दूसरा मीडिया साक्षरता पर जोर दे रहे हैं।

सवाल-आइआइएमसी में कौन-कौन सा कोर्स शुरू करवा रहे हैं।

जवाब- आइआइएमसी के अन्य ब्रांच में भी हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया का कोर्स प्रारंभ कर रहे हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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