भोपाल। नईदुनिया स्टेट ब्यूरो। प्रदेश में अब उद्योगों को छूट देने के मामले राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) में निर्णय के लिए नहीं रखे जाएंगे। ऐसे मामलों पर फैसले निवेश संवर्धन एवं प्रोत्साहन कैबिनेट कमेटी ही लेगी। इसके अध्यक्ष भी मुख्यमंत्री कमलनाथ ही हैं और पांच-छह मंत्री सदस्य हैं।

यह निर्णय मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हाईब्रिड मॉडल लागू करने संबंधी नीति को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बुधवार को लिया। उनका कहना है कि आमतौर पर कैबिनेट में इस तरह के मामलों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती है, जबकि निवेश संबंधी कैबिनेट कमेटी ऐसे ही मामलों पर निर्णय के लिए बनाई गई है।

कैबिनेट में नहीं हो पाती थी विस्तार से चर्चा

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में पेंशन, कर्मचारियों की समस्या और उद्योगों को छूट देने के मामलों पर विचार होता था, लेकिन विषय अधिक होने से इन पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नीतिगत निर्णय लेते हुए पहले पेंशन मामलों को देखने के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी बनाई।

इसके बाद कर्मचारियों से जुड़े मामलों को देखने के लिए डॉ. गोविंद सिंह की अध्यक्षता में एक और समिति बना दी। इसी तरह अनाज खरीदी से जुड़े मामलों के लिए भी कैबिनेट कमेटी बनाई गई है। अब उद्योगों को छूट देने के मामले में यह निर्णय लिया गया है कि इस तरह के मामले कैबिनेट नहीं, बल्कि निवेश संवर्धन एवं प्रोत्साहन कैबिनेट कमेटी में रखे जाएंगे, ताकि विस्तार से चर्चा हो सके। गुरुवार को ही ऐसे चार मामलों पर निवेश संवर्धन एवं प्रोत्साहन कैबिनेट कमेटी में विचार किया गया।

जितना रोजगार उतनी छूट

सरकार ने उद्योग प्रोत्साहन नीति में यह तय किया है कि जो उद्योग रोजगार अधिक देगा सरकार उसे उतनी ही अधिक सहायता देगी। इसके लिए स्थानीय निवासियों को 70 फीसदी रोजगार देने का प्रावधान भी नियमों में किया गया है। सीमेंट उद्योग के लिए यह शर्त भी रखी गई है कि वे परिवहन में मध्यप्रदेश में पंजीकृत वाहनों का ही उपयोग करेंगे।

Posted By: Hemant Upadhyay

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