भोपाल। रेल टिकट का रिफंड न मिलने और खाना खराब होने की शिकायत टि्वटर पर करते समय सावधान रहें। इस तरह की शिकायत के साथ मोबाइल नंबर या कोई व्यक्तिगत जानकारी न दें। मांगने पर पीएनआर नंबर दें। मोबाइल नंबर व व्यक्तिगत जानकारी देने पर आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है। जैसे रिफंड दिलाने के नाम पर इंटरनेशनल ठग रुपए हड़प सकते हैं। कुछ रेल यात्रियों के साथ ये घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बाद शुक्रवार को इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने अलर्ट जारी किया है। सलाह दी है कि पीएनआर नंबर ही दें, व्यक्तिगत जानकारी बिल्कुल भी न दें।

ये है मामला : दरअसल, ट्रेनों में खाना सप्लाई का अवैध कारोबार भी चलता है। ये कई बार यात्रियों को खराब गुणवत्ता वाला खाना पकड़ाकर चले जाते हैं। बाद में यात्री आईआरसीटीसी व रेलवे से जुड़े टि्वटर हैंडल पर शिकायत करते हैं। यही स्थिति ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के साथ बनती है। कई बार यात्रियों के टिकट कन्फर्म नहीं होते हैं। ज्यादातर मामलों में रिफंड ऑनलाइन वापस मिल जाता है लेकिन कई बार एक-दो यात्रियों का रिफंड नहीं मिलता। ऐसे यात्री टि्वटर पर शिकायत करते हैं। शिकायत करने वाले इन यात्रियों में से कुछ मोबाइल नंबर, खुद का पता भी साझा कर देते हैं। हर महीने ऐसे दो से तीन यात्रियों से धोखाधड़ी की शिकायतें आईआरसीटीसी को मिल रही हैं। इसे देखते हुए अलर्ट जारी कर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सलाह दी है।

साढ़े आठ लाख टिकट बुक होते हैं : आईआरसीटीसी 24 घंटे में साढ़े आठ लाख टिकट ऑनलाइन बेचता है। इनमें से रोज 25 से 30 फीसदी टिकट कन्फर्म नहीं होते। कुछ टिकट वापस कराए लिए जाते हैं। इनका रिफंड ऑनलाइन हो जाता है, लेकिन कई बार शिकायत आती है कि रिफंड में देरी हो गई।

यह करें यात्री

- शिकायत करते समय टि्वटर पर केवल पीएनआर नंबर ही साझा करें।

- रेलवे व आईआरसीटीसी से मेल पर संपर्क करें।

- रेलवे व आईआरसीटीसी के नजदीकी कार्यालयों से संपर्क करें, लिखित में शिकायत करें।

- रेलवे व आईआरसीटीसी द्वारा मांगने पर ही मोबाइल नंबर दें।

आईआरसीटीसी ने ये सलाह दी

रिफंड ऑटोमेटिक सुविधा है। इसके लिए कोई भी कहता है कि मोबाइल नंबर दे दीजिए, रिफंड करवा देंगे तो बिल्कुल भी विश्वास न करें। मोबाइल नंबर न दें। किसी लिंक को इंटरटेन न करें।

यात्रियों के साथ धोखाधड़ी की शिकायतें आ रही थी। उसे देखते हुए अलर्ट जारी किया है। महीने में दो से तीन यात्रियों के साथ घटनाएं होती थी। - सिद्धार्थ सिंह, मुख्य प्रवक्ता आईआरसीटीसी नई दिल्ली

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